मथुरा , जनवरी 12 -- सनातन धर्म और हिंदुत्व को लेकर चल रही राजनीतिक बयानबाजी के बीच अंतरराष्ट्रीय कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि हिंदू मूल रूप से अहिंसावादी है, लेकिन जब बात अस्तित्व, परिवार और धर्म की रक्षा की आती है, तो शस्त्र उठाना अंतिम और अनिवार्य विकल्प बन जाता है।

ठाकुर ने सोमवार को यहां पत्रकारों से कहा कि नेताओं के बयानों पर प्रतिक्रिया देना उनका काम नहीं है, लेकिन वे सनातन के सत्य को सामने रखना चाहते हैं। उन्होंने कहा, "हम 'सर्वे भवन्तु सुखिनः' की मर्यादा वाले लोग हैं। लेकिन इसी मर्यादा और अत्यधिक सहनशीलता के कारण हमने अफगानिस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश जैसे क्षेत्रों में अपना अस्तित्व खो दिया।" उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि अब सनातनी अपनी सुरक्षा के प्रति सजग हो रहे हैं।

कथावाचक ने भारत की सांस्कृतिक विरासत का उल्लेख करते हुए कहा कि यह देश बुद्ध का है, तो साथ ही युद्ध का भी है। रामायण और महाभारत का उदाहरण देते हुए उन्होंने समझाया कि "युद्ध हमेशा अंतिम विकल्प रहा है। भगवान कृष्ण ने भी शांति के लिए पांच गांव मांगे थे, लेकिन जब अन्याय की सीमा पार हो गई, तब महाभारत जैसा महायुद्ध हुआ।"देवकीनंदन ठाकुर ने कहा कि हिंदू कभी किसी की जमीन छीनने नहीं गया, लेकिन अगर कोई हिंदू की गाय, मां या बहन-बेटी की इज्जत पर हाथ डालेगा, तो हिंदू का चुप रहना संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि उनके भगवान भी धर्म की रक्षा के लिए ही अवतार लेते हैं। हिंदुत्व पर आक्रमण का अर्थ है पूरी मानवता पर आक्रमण, क्योंकि सनातन ही विश्व को जीने की सही कला सिखाता है।हमारी नीति 'जियो और जीने दो' की है, लेकिन अगर कोई हमें जीने ही न दे, तो 'धर्मो रक्षति रक्षितः' ही एकमात्र मार्ग बचता है।

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