ऋषिकेश/देहरादून , नवंबर 02 -- उत्तराखंड में योगनगरी ऋषिकेश स्थित परमार्थ निकेतन में रविवार को दो दिवसीय हृदय रोग एवं आर्थो-स्पाइन चिकित्सा जाँच शिविर का समापन हो गया। इसके साथ ही, दस दिवसीय मोतियाबिंद चिकित्सा शिविर का शुभारम्भ कर दिया गया।
इन शिविरों में भारत ही नहीं, अपितु आस्ट्रेलिया, अमेरिका, इग्लैंड, नेपाल सहित अन्य देशों के नेत्र चिकित्सा विशेषज्ञ अपनी सेवाएं प्रदान करेंगे।
कार्यक्रम का शुभारम्भ परमार्थ निकेतन के परम अध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती एवं साध्वी भगवती सरस्वती और चिकित्सकों ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलन के साथ किया।
इस अवसर पर स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने कहा कि सेवा ही सच्ची साधना है। आँखों की रोशनी सिर्फ दृष्टि ही नहीं देती, यह जीवन को नई दिशा और नया उजाला भी प्रदान करती है। किसी व्यक्ति को अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाना सबसे बड़ा पुण्य है। उन्होंने सभी चिकित्सकों एवं सहयोगियों के प्रति हृदय से आभार व्यक्त किया कि वे अपनी व्यस्तताओं के बीच समय निकाल कर मानवता की इस दिव्य सेवा में सहभागी बनते हैं।
साध्वी भगवती सरस्वती ने कहा कि परमार्थ निकेतन सदैव से 'सर्वे भवन्तु सुखिन' के दिव्य मंत्र को जीवन में उतारने का कार्य करता आया है। स्वास्थ्य सेवा के ऐसे शिविर समाज के हर तबके के लोगों के लिए अत्यंत उपयोगी होते हैं, विशेषकर उनके लिए जो आर्थिक रूप से महंगे उपचार का खर्च नहीं उठा पाते।
उन्होंने यह भी कहा कि एक स्वस्थ दृष्टि, एक स्वस्थ हृदय और एक सशक्त रीढ़ यही जीवन की असली समृद्धि है।
इस मोतियाबिंद चिकित्सा शिविर में अमेरिका से पधारे वरिष्ठ नेत्र चिकित्सक डॉ. मनोज पटेल, ऑस्ट्रेलिया से डॉ. पूर्णिमा राय, इंग्लैंड से डॉ. योगा, भारत के प्रख्यात विशेषज्ञ डाॅ मिलिंद भिडे, डॉ. विवेक जैन, डॉ. संपथ, डॉ. अश्विनी सुहासराव, डॉ. इरीना, डॉ. साई सुश्रुथा पेरुरी, डॉ. पारुल देसाई, डॉ. सतीश देसाई, डॉ. कलई, डॉ. आनंद चंद्रशेखरन, डॉ. विजयलक्ष्मी वद्रेवी, डॉ. भट्ट, डॉ. नीलिमा गाँधम, डॉ. जया माधुरी तथा डॉ. रोजी आहूजा सहित अनेक विशेषज्ञ चिकित्सक सहभाग कर रहे हैं।
उल्लेखनीय है कि दस दिवसीय मोतियाबिंद शिविर में दूर-दूर के क्षेत्रों से आए मरीजों के निःशुल्क नेत्र परीक्षण, दवाइ एवं ऑपरेशन की व्यवस्थायें परमार्थ निकेतन द्वारा सुनिश्चित करायी जा रही है। जबकि इससे पहले हृदय रोग एवं आर्थो-स्पाइन शिविर में विशेषज्ञ डॉक्टरों ने सैकड़ों मरीजों की जाँच कर, उचित सुझाव एवं उपचार प्रदान किया। विशेष रूप से वृद्धजनों में रक्तचाप एवं हृदय संबंधी कई समस्याएँ पाई गईं, जिनके त्वरित समाधान के लिए टीम अभी भी निरंतर कार्यरत है।
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