मुंबई , मार्च 18 -- पर्यावरण कार्यकर्ता रोहन भाटे शाह ने केरल के 'होस्टाइल एक्टिविटी वॉच कर्नल' (हॉक) और 'फॉरेस्ट इंटेलिजेंस सेल' (एफआईसी) से प्रेरणा लेते हुए महाराष्ट्र में एक विशेष वन्यजीव अपराध नियंत्रण प्रभाग बनाने का प्रस्ताव दिया है।

सतारा जिले के कराड निवासी श्री शाह ने नागपुर स्थित मुख्य वन्यजीव वार्डन-सह-प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) को पत्र लिखा है। अपने प्रतिवेदन में उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि वन्यजीव अपराध अब अत्यधिक संगठित हो गया है, जिसमें अवैध शिकार, वन्यजीव उत्पादों का व्यापार और तस्करी नेटवर्क शामिल हैं जो अक्सर राज्य के साथ-साथ अंतर्राष्ट्रीय सीमाओं के पार भी संचालित होते हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि ऐसी संगठित गतिविधियों से निपटने के लिए मजबूत खुफिया प्रणाली, समन्वित प्रवर्तन और आधुनिक डिजिटल उपकरणों के उपयोग की आवश्यकता है।

उन्होंने केरल के अनुभव का हवाला देते हुए अगस्त 2020 से परिचालन में रहे एक केंद्रीय डिजिटल प्लेटफॉर्म 'हॉक' प्रणाली पर प्रकाश डाला। यह प्रणाली अधिकारियों को वन्यजीव अपराधों का दस्तावेजीकरण करने, अपराधियों का रिकॉर्ड रखने, वन्यजीवों की मृत्यु की निगरानी करने और एक सुरक्षित एवं एकीकृत पोर्टल के माध्यम से जांच पर नजर रखने में सक्षम बनाती है। 'वाइल्डलाइफ ट्रस्ट ऑफ इंडिया' के सहयोग से विकसित इस प्रणाली ने पारदर्शिता में सुधार किया है, खुफिया जानकारी साझा करने को मजबूत किया है और कागजों पर रिकॉर्ड दर्ज करने पर निर्भरता कम की है, जिससे डेटा के साथ छेड़छाड़ की संभावना सीमित हो गई है।

पर्यावरण कार्यकर्ता ने केरल के 'फॉरेस्ट इंटेलिजेंस सेल' की भूमिका को भी रेखांकित किया, जिसे हाथी दांत के शिकार, संगठित वन्यजीव तस्करी और चंदन की तस्करी जैसे गंभीर अपराधों से निपटने का काम सौंपा गया है। यह इकाई खुफिया जानकारी एकत्र करने, प्रवर्तन अभियानों के समन्वय और ऐसी अवैध गतिविधियों में शामिल नेटवर्क की पहचान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

श्री शाह के अनुसार, केरल वन विभाग ने 'वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो' और अन्य संरक्षण निकायों के साथ मिलकर काम करके अपने प्रवर्तन को और मजबूत किया है। इससे वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के तहत प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करने, अंतर-एजेंसी समन्वय बढ़ाने और अधिकारियों की क्षमता निर्माण में मदद मिली है। 'हॉक' प्लेटफॉर्म को कर्नाटक जैसे राज्यों ने भी प्रवर्तन के लिए एक प्रभावी डिजिटल उपकरण के रूप में अपनाया है।

महाराष्ट्र के पारिस्थितिक महत्व और विशाल जैव विविधता पर प्रकाश डालते हुए श्री शाह ने कहा कि राज्य को डिजिटल निगरानी प्रणाली द्वारा समर्थित एक समान समर्पित प्रभाग स्थापित करने से लाभ होगा। उन्होंने सुझाव दिया कि ऐसा सेटअप खुफिया जानकारी एकत्र करने, अपराध के पैटर्न का विश्लेषण करने, अपराधियों का डेटाबेस बनाए रखने, राष्ट्रीय एजेंसियों के साथ समन्वय करने और विभिन्न क्षेत्रों में वन्यजीव अपराध के रुझानों पर नज़र रखने पर ध्यान केंद्रित कर सकता है।

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