नैनीताल , जनवरी 09 -- उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने हाथी कॉरिडोर (गलियारा) से जुड़ी जनहित याचिका (पीआईएल) को शुक्रवार को बिना ठोस आदेश पारित किए हुए पूरी तरह से बंद कर दिया और कहा कि इस मुद्दे को उच्चतम न्यायालय पहले ही पूर्णतः सुलझा चुका है।

मुख्य न्यायाधीश जी. नरेंदर और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ साह की खंडपीठ ने देहरादून निवासी रेनू पॉल द्वारा दायर जनहित याचिका को पूरी तरह से निस्तारित कर दिया है।

खंडपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि इस मामले पर दुबारा सुनवाई करना "पुनरावृत्ति के साथ ही अनावश्यक" होगा, क्योंकि उच्च न्यायालय और राज्य सरकार हॉस्पिटैलिटी एसोसिएशन ऑफ मुदुमलाई बनाम इन डिफेंस ऑफ एनवायरनमेंट एंड एनिमल्स एंड अदर्स (2020) मामले में हाईकोर्ट के फैसले से पूरी तरह से बंधे हुए हैं।

खंडपीठ ने कहा कि वन एवं पर्यावरण से जुड़े मुद्दे पहले ही शीर्ष अदालत में अनीता कांडवाल बनाम उत्तराखंड राज्य (विशेष याचिका संख्या 21058/2025) मामले में लंबित है। खंडपीठ ने कहा कि इस मामले पर उच्चतम न्यायालय के फैसले का इंतजार करना उचित होगा।

अदालत ने याचिकाकर्ता को शीर्ष अदालत में चल रहे मामले में बतौर पक्षकार शामिल होने और अपना पक्ष रखने की छूट दी है। याचिकाकर्ता की ओर से मुख्य रूप से हाथी कॉरिडोर, वन एवं पर्यावरण के साथ ही हरित आवरण को नुक़सान और पेड़ों की कटाई जैसे मुद्दे उठाए गए थे।

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