रायगढ़ , जनवरी 29 -- ) छत्तीसगढ़ में प्रशासन ने रायगढ़ जिले के जंगलों के किनारे स्थित 42 कुओं को सुरक्षित करने का निर्णय लिया है। इसके तहत इन चिह्नित कुओं के चारों ओर अब तीन फीट ऊंची दीवार बनाई जाएगी और ऊपर से लोहे की जाली लगाकर उन्हें सुरक्षित किया जाएगा।

रायगढ़ जिले में सालभर हाथियों की आवाजाही बनी रहती है। इसी वजह से कई बार जंगल से सटे खुले कुओं में हाथी शावकों के गिरने की घटनाएं सामने आती रही हैं। इन घटनाओं पर रोक लगाने के लिए वन विभाग ने ठोस कदम उठाया है।

वर्ष 2025 में जिले में हाथी शावकों के कुओं में गिरने की दो घटनाएं सामने आई थीं। एक मामला खरसिया रेंज और दूसरा घरघोड़ा रेंज का था। दोनों ही मामलों में संबंधित कुओं के चारों ओर न तो सुरक्षा दीवार थी और न ही ऊपर कोई ढंकाव, जिससे रात के समय हाथी शावक कुओं में गिर गए थे।

हालांकि वन विभाग द्वारा त्वरित कार्रवाई करते हुए दो से तीन घंटे के भीतर दोनों शावकों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया था।

इन घटनाओं से सबक लेते हुए वन विभाग ने ऐसे कुओं को सुरक्षित करने के लिए प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजा था। प्रस्ताव को स्वीकृति मिलने के बाद अब इस योजना पर अमल शुरू किया जा रहा है। रायगढ़ वन मंडल के अंतर्गत चार रेंज में स्थित कुल 42 कुओं को पहले चरण में सुरक्षित किया जाएगा।

वन विभाग के अनुसार, ये सभी कुएं जमीन की सतह पर बने हुए हैं और जंगल के किनारे स्थित हैं, जहां हाथियों की नियमित आवाजाही रहती है। इन कुओं के चारों ओर तीन फीट ऊंची दीवार बनाई जाएगी और ऊपर से मजबूत लोहे की जाली लगाई जाएगी, ताकि हाथी या अन्य वन्य जीव उसमें गिर न सकें।

जिला वन अधिकारी (डीएफओ) अरविंद पीएम ने बताया कि पिछले वर्ष दो हाथी शावकों के कुओं में गिरने की घटनाएं हुई थीं, जिन्हें समय रहते रेस्क्यू कर लिया गया था। इसी के बाद ऐसे असुरक्षित कुओं की पहचान कर प्रस्ताव तैयार किया गया। पहले चरण में 42 कुओं को सुरक्षित किया जाएगा, जबकि दूसरे चरण में करीब 120 से 142 अन्य चिन्हित कुओं पर भी इसी तरह का कार्य किया जाएगा।

वन विभाग की इस पहल से हाथी शावकों की सुरक्षा सुनिश्चित होने के साथ-साथ मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं में भी कमी आने की उम्मीद है।

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