नयी दिल्ली , फरवरी 11 -- भारतीय तटरक्षक बल (आईसीजी) ने मुंबई तट से करीब 100 समुद्री मील दूर रोके गए तीन जहाज़ों के खिलाफ औपचारिक जांच शुरू कर दी है। इन पर एक संगठित अंतरराष्ट्रीय तेल तस्करी नेटवर्क का हिस्सा होने का संदेह है। फिलहाल ये तीनों पोत मुंबई तट के पास लंगर डाले हुए हैं।

अधिकारियों के अनुसार, जांच में यह संकेत मिले हैं कि कम लागत वाले तेल और तेल-आधारित कार्गो को संघर्ष प्रभावित क्षेत्रों से समुद्री मार्ग के जरिए गुप्त रूप से स्थानांतरित किया जा रहा था।

समुद्री खुफिया आकलन बताते हैं कि जांच के दायरे में आए ये जहाज़ ईरान-संबंधित पेट्रोलियम व्यापार से जुड़े अमेरिकी प्रतिबंधों की सूची में भी शामिल हैं। अमेरिकी वित्त विभाग के ऑफिस ऑफ फॉरेन एसेट्स कंट्रोलजांच एजेंसियां इन जहाज़ों के संभावित संबंध संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) स्थित भारतीय कारोबारी जुगविंदर सिंह बरार से जुड़े एक व्यापक नेटवर्क से भी जोड़कर देख रही हैं। अमेरिकी खुलासों में बरार पर जहाज़-से-जहाज़ (एसटीएस) ट्रांसफर के जरिए ईरानी तेल की उत्पत्ति छिपाने के आरोपों का उल्लेख किया गया है।

इसमें शामिल जहाज़, स्टेलर रूबी, एस्फ़ाल्ट स्टार और अल जाफ़ज़िया को तब रोका गया जब अधिकारियों को भारत के एक्सक्लूसिव इकोनॉमिक ज़ोन में संदिग्ध समुद्री गतिविधि का पता चला। तटरक्षक बल के प्रवक्ता कमांडेंट अमित उनियाल ने बताया कि तकनीक-आधारित निगरानी प्रणालियों और समुद्र-हवाई संयुक्त ऑपरेशन के जरिए पिछले सप्ताह इस रैकेट का खुलासा हुआ।

डिजिटल ट्रैकिंग के दौरान एक मोटर टैंकर की समुद्र में असामान्य गतिविधि सामने आई, जिसके बाद उससे जुड़े अन्य पोतों की गतिविधियों की गहन जांच की गई। डेटा पैटर्न विश्लेषण से दो और जहाज़ों की पहचान हुई, जिन पर मध्य समुद्र में अवैध ट्रांसफर के जरिए कस्टम ड्यूटी और नियामकीय निगरानी से बचने का संदेह है।

पांच फरवरी को विशेषज्ञ बोर्डिंग टीमों ने तीनों जहाज़ों को रोका। जहाज़ों की तलाशी, इलेक्ट्रॉनिक डेटा की जांच, दस्तावेजों के सत्यापन और चालक दल से पूछताछ के जरिए कथित तौर पर पूरे घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ी गईं।

अधिकारियों का कहना है कि ये पोत अक्सर अपनी पहचान और पंजीकरण विवरण बदलते रहे, जिससे निगरानी से बचा जा सके। शिपिंग विश्लेषण से यह भी संकेत मिला है कि इनकी समुद्री यात्राएं और अपतटीय मुलाकातें उन पैटर्न से मेल खाती हैं, जो प्रतिबंधित या गुप्त तेल परिवहन में शामिल तथाकथित "शैडो फ्लीट" की विशेषता मानी जाती हैं।

समुद्री ट्रैकिंग फर्म पोल स्टार ग्लोबल ने बसरा और खोर फक्कन के आसपास के क्षेत्रों से भारत के पश्चिमी तट तक इन जहाज़ों की गतिविधियों का संकेत दिया है। वहीं टैंकरट्रैकर्सडॉटकॉम ने इनके फ्लैग इतिहास और पहचान में अनियमितताओं को रेखांकित किया है।

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