चंडीगढ़ , दिसंबर 04 -- शिरोमणि अकाली दल के वरिष्ठ नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री बिक्रम सिंह मजीठिया को पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय से राहत नहीं मिली । ड्रग्स से जुड़े बहुचर्चित मामले में दायर उनकी जमानत याचिका को न्यायालय ने खारिज कर दिया है, जिससे मजीठिया को बड़ा झटका लगा है। अब उनके पास उच्चतम न्यायालय में अपील करने का ही रास्ता बचा है।
मजीठिया को 25 जून को गिरफ्तार किया गया था। गिरफ्तारी के बाद से ही वह जेल में बंद हैं और लगातार जमानत के प्रयास कर रहे थे। उन्होंने अदालत में कई आधारों पर दलीलें पेश कीं, लेकिन अदालत ने उन्हें स्वीकार नहीं किया। अकाली दल ने इस फैसले के बाद सरकार पर राजनीतिक प्रतिशोध का आरोप लगाया है, जबकि पार्टी नेताओं का कहना है कि मजीठिया को राजनीति के चलते निशाना बनाया जा रहा है।
उधर, इस पूरे मामले में मजीठिया के साले गजपत सिंह ग्रेवाल की परेशानी भी बढ़ती जा रही है। अदालत में ग्रेवाल की ओर से उनके वकील जवाब दाखिल करेंगे। ग्रेवाल को इस मामले में पहले ही नामजद किया जा चुका है। यदि अदालत उन्हें भगोड़ा घोषित करती है, तो उनके खिलाफ कार्रवाई और सख्त हो जाएगी और गिरफ्तारी की प्रक्रिया तेज होगी।
इस मामले को लेकर पंजाब की राजनीति में एक बार फिर गरमाहट आ गई है। जहां विपक्ष इसे राजनीतिक बदले की कार्रवाई बता रहा है, वहीं सरकार का कहना है कि जांच एजेंसियां कानून के अनुसार अपना काम कर रही हैं। उच्च न्यायालय के इस निर्णय ने इस मुद्दे को फिर से राजनीतिक चर्चा के केंद्र में ला दिया है।
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