लखनऊ , नवंबर 19 -- उत्तर प्रदेश उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने 11 वर्षों से विचाराधीन एक जनहित याचिका के मामले में विभागीय उदासीनता पर कड़ी नाराज़गी व्यक्त करते हुए राज्य सरकार पर 15 हजार रुपये का हर्जाना लगाया है। यह मामला मैंगो बेल्ट में पेड़ों के जियो-टैगिंग करवाने का है।

न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति राजीव भारती की खंडपीठ ने यह आदेश जयंत सिंह तोमर की याचिका पर दिया है। वहीं, आदेश के बावजूद एनएचएआई और उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा भी जवाब न देने पर भी नाराजगी जतायी है। सुनवायी के दौरान अदालत ने पहले भी पूछा था कि कि क्या मैंगो बेल्ट में पेड़ों के जियो-टैगिंग की वैज्ञानिक पद्धति अपनाई जा सकती है लेकिन इस बार भी राज्य सरकार की ओर से पेश अधिवक्ता ने सरकार से निर्देश लेकर जानकारी देने की बात कही।

इस पर अदालत ने कहा कि यह मामला 11 वर्षों से लंबित है और राज्य पक्ष अभी भी निर्देश लेने की बात कर रहा है, जो स्वीकार नहीं है। अदालत ने मामले की अगली सुनवायी 25 नवंबर को मुकर्रर की गयी है।

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