न्यायालय याचिकाकर्ता प्रतिशपथनैनीताल , जनवरी 05 -- उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने इंटरनेशनल पब्लिक वेलफेयर सोसायटी की ओर से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए सोमवार को समाज कल्याण छात्रवृत्ति घोटाले के मामले में याचिकाकर्ता से प्रतिशपथ पत्र पेश करने को कहा है।

मुख्य न्यायाधीश जी. नरेंदर और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ में इस मामले में सोमवार को सुनवाई हुई। आज सरकार की ओर से कहा गया कि छात्रवृत्ति घोटाले की जांच चल रही है। महालेखाकार से जांच कराये जाने की आवश्यकता नहीं है। अभी तक की जांच रिपोर्ट अदालत में प्रस्तुत की जा चुकी है।

इसके बाद अदालत ने याचिकाकर्ता से कहा कि वे इस पर अपनी प्रतिक्रिया 10 दिन के अंदर प्रतिशपथ पत्र के माध्यम से अदालत में पेश करें।

इससे पहले अदालत ने राज्य सरकार से इस मामले की जांच महालेखाकार से कराये जाने को लेकर जवाब मांगा था। दायर याचिका में कहा गया कियाचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि प्रदेश में वर्ष 2011 से 20214 के मध्य निजी महाविद्यालयों द्वारा अनुसूचित जाति-जनजाति के छात्रों के फर्जी नामांकन के माध्यम से छात्रवृत्ति की धनराशि हड़पने का मामला सामने आया था।

उच्च न्यायालय के निर्देश पर इस मामले की जांच विशेष अनुसंधान दल (एसआईटी) की दो टीमों की ओर से की जा रही है। अभी जांच पूरी नहीं हो पायी है। इस मामले में अभी तक 156 मामले दर्ज हो चुके हैं और एसआईटी 100 से अधिक लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है।

याचिकाकर्ता की ओर से यह भी कहा गया कि वर्ष 2018 से अभियोजन लंबित होने के चलते एससी-एसटी के छात्र उच्च शिक्षा में प्रवेश प्राप्त नहीं कर पा रहे हैं। साथ ही आपराधिक मुकदमों के समाप्त होने की भी कोई संभावना नजर नहीं आ रही है। लंबित मामले के चलते उच्च शिक्षा में अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति (एससी-एसटी) के छात्रों के प्रवेश में गिरावट आई है।

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