नैनीताल , अक्टूबर 30 -- उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने अपने अहम फैसले में लगभग आठ साल से लापता महंत मोहनदास से जुड़े मामले की जांच केन्द्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को सौंपने के निर्देश दिये हैं।

न्यायमूर्ति पंकज पुरोहित की पीठ ने अपने फैसले में प्रदेश की जांच एजेंसियों की कार्यशैली पर सवाल खड़े किए हैं। कनखल हरिद्वार राजघाट स्थित श्री पंचायती अखाड़ा बड़ा उदासीन के महंत और अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय प्रवक्ता सुखदेव मुनि 16 सितंबर, 2017 को लोकमान्य तिलक एक्सप्रेस से मुंबई की यात्रा करते हुए लापता हो गए थे।

ट्रेन के भोपाल रेलवे स्टेशन पहुंचने पर उनके शिष्य को महंत मोहनदास अपनी निर्धारित सीट पर नहीं मिले। इसके बाद, कनखल पुलिस स्टेशन में उनके लापता होने की रिपोर्ट दर्ज की गई। अदालत ने पाया कि लगभग आठ साल बीत जाने के बाद भी जांच एजेंसी किसी नतीजे पर नहीं पहुंच पाई और इस दौरान जांच को हस्तांतरित किया जाता रहा।

यहां तक कि एक बार फाइनल रिपोर्ट भी लगा दी गई जिसे मजिस्ट्रेट ने खारिज कर दिया और पुनः जांच के आदेश दे दिए। इसके बाद महंत सुखदेव मुनि ने सीबीआई जांच की मांग को लेकर उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। उनके अधिवक्ता ने दलील दी कि निष्पक्ष और उचित जांच हर नागरिक का मौलिक अधिकार है और जांच एजेंसी की लापरवाही के चलते इस प्रकरण को सीबीआई को सौंपा जाना अनुच्छेद 14 और 21 के तहत आवश्यक है।

अदालत ने अपने निर्णय में कहा कि देश का एक नागरिक आठ साल से लापता है और जांच एजेंसियां उसका पता नहीं लगा पाई हैं। इससे अदालत की अंतरात्मा हिल उठना स्वाभाविक है। न्यायालय ने यह भी कहा कि जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार की गारंटी देने वाला संविधान का अनुच्छेद 21 यह भी सुनिश्चित करता है कि लापता व्यक्ति का पता लगाया जाए। इसलिए न्याय के हित में मामले को सीबीआई को हस्तांतरित करना आवश्यक है।

अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिए कि इस मामले से जुड़े सभी दस्तावेज तत्काल प्रभाव से सीबीआई को सौंपे जायें। इस मामले में अदालत ने निर्णय सुरक्षित रख लिया था जिसे बुधवार 29 अक्टूबर को जारी किया गया। अदालत की प्रति आज मिली है।

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