इंदौर , जनवरी 21 -- देश में सबसे स्वच्छ शहर का तमगा हासिल करने वाले इंदौर में जल और वायु प्रदूषण के गंभीर मामलों को लेकर हाईकोर्ट की कड़ी फटकार के बाद अब मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड एक्शन मोड में आ गया है। हाईकोर्ट के स्वतः संज्ञान के बाद बोर्ड ने जिले के 243 ऐसे उद्योगों को नोटिस जारी किए हैं, जो बिना अनुमति संचालित होकर खुलेआम प्रदूषण फैला रहे थे। इन उद्योगों की बिजली काटने की कार्रवाई भी शुरू की जा रही है।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि अब केवल नोटिस देकर औपचारिकता नहीं निभाई जाएगी, बल्कि नियमों का उल्लंघन करने वाले उद्योगों को सीधे बंद कराया जाएगा। बोर्ड के अनुसार, इन उद्योगों में कई ऐसे हैं जो न तो लाइसेंसधारी हैं और न ही जल एवं वायु प्रदूषण नियंत्रण नियमों का पालन कर रहे हैं।
हाईकोर्ट ने माना है कि इंदौर में पानी की गुणवत्ता पहले ही खराब पाई जा चुकी है और हवा की स्थिति भी लगातार खतरनाक स्तर की ओर बढ़ रही है। यह स्थिति मध्यप्रदेश जल प्रदूषण निवारण अधिनियम और वायु प्रदूषण निवारण अधिनियम का खुला उल्लंघन है। जिले में खनन, स्टोन क्रशर तथा रेड और ऑरेंज श्रेणी के उद्योगों को सबसे बड़े प्रदूषणकर्ता बताया गया है, जिनसे पर्यावरण के साथ-साथ आम नागरिकों की सेहत पर भी सीधा असर पड़ रहा है।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के इंदौर क्षेत्रीय अधिकारी सतीश चौकसे ने बताया कि 243 उद्योगों को नोटिस जारी किए गए हैं और इनमें से कई बिना किसी अनुमति के चल रहे हैं। ऐसे उद्योगों की सूची बिजली कंपनी को सौंप दी गई है, ताकि उनके बिजली कनेक्शन काटे जा सकें।
हाईकोर्ट में पेश रिपोर्ट के अनुसार इंदौर जिले में कुल 5961 उद्योग पंजीकृत हैं, जिनमें से एक हजार से अधिक उद्योग बिना प्रदूषण विभाग की अनुमति के संचालित पाए गए हैं। कई उद्योग वर्षों से नियमों की अनदेखी करते हुए काम कर रहे थे।
मामले की अगली सुनवाई 9 फरवरी को हाईकोर्ट में होगी, जहां प्रदूषण बोर्ड की रिपोर्ट के आधार पर महाधिवक्ता जवाब पेश करेंगे। यदि जवाब संतोषजनक नहीं रहा, तो और कड़ी कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है।
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