नैनीताल , नवम्बर 18 -- उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने नैनीताल में स्वास्थ्य सुविधा की कमी को देखते हुए मंगलवार को भवाली टीबी सेनिटोरियम की भूमि पर मल्टी स्पेशलिटी अस्पताल बनाने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने एक दिसंबर तक प्रदेश सरकार से प्रस्ताव मांगा है।

मुख्य न्यायाधीश जी. नरेंदर और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने प्रदेश भर के जिला अस्पतालों में बदहाल स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर उत्तराखंड स्टेट लीगल सर्विस अथाॅरिटी की ओर से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए ये निर्देश दिए। आज स्वास्थ्य महानिदेशक (डीजी) डाॅ. सुनीता टम्टा अदालत में व्यक्तिगत रूप से पेश हुई।

सरकार की ओर से कहा गया कि नैनीताल का बीडी पांडे जिला अस्पताल में पर्याप्त चिकित्सक और स्वास्थ्य सुविधाएं मौजूद हैं। अस्पताल के पास अतिरिक्त भूमि भी मौजूद है। उसमें आवश्यक सुविधाएं जुटाई जा सकती है।

याचिकाकर्ता के अधिवक्ता दुष्यंत मैनाली की ओर से इसका विरोध करते हुए कहा गया कि जिला अस्पताल में चिकित्सकों, पैरा मेडिकल स्टाफ और उपकरणों की भारी कमी है। उच्चतम न्यायालय भी प्रदेश सरकार को भवाली या नैनीताल में सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल बनाने के लिए आदेश जारी कर चुका है।

अंत में अदालत ने महत्वपूर्ण निर्णय जारी करते हुए कहा कि सरकार भवाली में एक दिसंबर तक मल्टी स्पेशलिटी अस्पताल बनाने के लिए ठोस प्लान पेश करे। डीजी ने कहा कि वह इस संदर्भ में सचिव स्वास्थ्य से बात करेगी।

अदालत ने अपने आदेश में यह भी कहा कि भवाली में मल्टी स्पेशलिटी अस्पताल के निर्माण होने से पहाड़ी क्षेत्र की जनता को भी इसका लाभ होगा और लोगों को निजी अस्पतालों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। अदालत इस मामले में एक दिसंबर को सुनवाई करेगी। अदालत ने अपने आदेश में यह भी कहा है कि आदेश की प्रति स्वास्थ्य मंत्री धन सिंह रावत और स्वास्थ्य सचिव को मेल से उपलब्ध कराया जाये।

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