नैनीताल , दिसंबर 17 -- उत्तराखण्ड उच्च न्यायालय ने हल्द्वानी में अवैध रूप संचालित फड़ (फुटपाथ पर स्थायी रुप से लगायी गयी दुकानों) , ठेलों को हटाए जाने को लेकर दायर जनहित याचिका पर बुधवार को सुनवाई करते हुए हल्द्वानी के नगर आयुक्त और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) को निर्देश दिए कि पंजीकृत रजिस्टर्ड फड़ व ठेले व्यवसायियों के संचालन के लिए स्थान का चयन करें।

अदालत ने कहा कि ई-रिक्शा व टैम्पो के लिए भी पार्किंग के लिए भूमि का चयन कर करें। अदालत ने रिपोर्ट 29 दिसम्बर तक न्यायालय में पेश करने के निर्देश दिए। इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 29 दिसंबर की तिथि नियत की गई है।

हल्द्वानी निवासी सामाजिक कार्यकर्ता हितेश पांडे ने जनहित याचिका दायर कर कहा कि हल्द्वानी शहर के बाजारों, फुटपाथों, सार्वजनिक स्थानों और गलियों में अवैध फड़ और ठेले लगाये जा रहे हैं। उनका पंजीकरण भी नहीं है। इससे बाजारों में भीड़भाड़ और अव्यवस्था उत्पन्न हो रही है। आम जनता के लिए चलने की जगह तक नहीं रह गयी है। यही नहीं भीड़भाड़ वाले बाजारों में ई रिक्शा व टेम्पो भी घुस जा रहे हैंं, जिनकी वजह से दुर्घटनाएं भी हो रही हैं। कुछ दुकान मालिक भी इसको बढ़ावा दे रहे हैं और अपनी दुकान के आगे फड़ और ठेलों वालों को प्रश्रय दे रहे हैं।

उन्होंने कहा कि इन लोगों का कोई रिकार्ड भी नगर निगम के पास उपलब्ध नहीं है। फलस्वरूप शहर में अपराध भी बढ़ रहे हैं। जनहित याचिका में कोर्ट से प्रार्थना की गई है कि अवैध रूप से चल रहे फड़़ ठेलों को हटाया जाय। साथ ही पंजीकृत फड़ड़ व्यवसायियों के लिए स्थान का चयन किया जाय। साथ ही टेम्पो व ई रिक्शा का लिए भी पार्किंग की व्यवस्था कराई जाय। सड़कों पर अवैध रूप से खड़े वाहनों को हटाया जाय।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित