नैनीताल , दिसंबर 08 -- उत्तराखंड के हल्द्वानी दंगा के कथित मुख्य साजिशकर्ता अब्दुल मलिक को उच्च न्यायालय से सोमवार को जमानत नहीं मिल पायी है। न्यायालय ने उस पर लगे आरोपों के संबंध में प्रदेश सरकार से पूरा ब्योरा उपलब्ध कराने को कहा है। इसी के साथ ही अदालत ने हल्द्वानी दंगा के तीन अन्य आरोपियों को जमानत प्रदान कर दी है।
वरिष्ठ न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी और न्यायमूर्ति पंकज पुरोहित की खंडपीठ में आज हल्द्वानी दंगा से जुड़े मुख्य आरोपी अब्दुल मलिक समेत कुल 16 मामलों में सुनवाई हुई। इनमें से तीन ही आरोपियों को जमानत मिल पायी है। जिन आरोपियों को जमानत मिली है उनमें दानिश मलिक, जुनैद और अयाज अहमद शामिल है। अदालत ने हल्द्वानी नगर निगम के पूर्व पार्षद जीशान परवेज उर्फ सेबू को भी जमानत नहीं दी है। सभी आरोपियों के मामले में अदालत दो सप्ताह बाद सुनवाई करेगी।
मुख्य साजिशकर्ता अब्दुल मलिक की ओर से जमानत की मांग करते हुए कहा गया कि वह निर्दोष है। घटना के दिन वह मौके पर मौजूद नहीं था। उसके खिलाफ कोई ठोस साक्ष्य भी मौजूद नहीं हैं। वह वरिष्ठ नागरिक है और पिछले वर्ष फरवरी से जेल में बंद है।
प्रदेश सरकार की ओर से जमानत का विरोध करते हुए कहा गया कि वह मुख्य आरोपी है। उस पर पूरी साजिश रचने के गंभीर आरोप हैं। उसने सरकारी जमीन पर कब्जा किया और जब प्रशासन की टीम वहां पहुंची तो उन पर हमला कर दिया।
अदालत ने आरोपी को आज जमानत देने से इनकार करते हुए सरकार को निर्देश दिये वह आरोपी पर लगे सभी आरोपों का ब्योरा अदालत में पेश करे। सभी आरोपियों के बारे में भी अदालत दो सप्ताह बाद सुनवाई करेगी।
उल्लेखनीय है कि पिछले साल आठ फरवरी को हल्द्वानी के बनभूलपुरा में सरकारी जमीन से कब्जा हटाने के दौरान दंगा भड़क गया था। एक समुदाय विशेष के लोगों ने प्रशासन की टीम पर हमला बोल दिया और बनभूलपुरा थाना को आग लगा दिया था। इस दंगा में 05 लोगों की मौत हो गयी थी और कई लोग घायल हो गये थे।
प्रशासन ने दंगा के 100 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया था और उन पर गैर कानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) लगा दिया था।
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