रायसेन , फरवरी 23 -- मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोमवार को रायसेन जिले में हलाली बांध के समीप पांच गिद्धों को प्राकृतिक आवास में छोड़ा। इनमें चार भारतीय गिद्ध तथा एक सिनेरियस गिद्ध शामिल है। प्राकृतिक वातावरण में छोड़े गए गिद्धों पर उपग्रह आधारित यंत्र लगाए गए हैं, जिससे उनके आवागमन, व्यवहार और सुरक्षा की सतत निगरानी की जा सके।
इन दुर्लभ प्रजाति के गिद्धों को भोपाल स्थित गिद्ध संरक्षण प्रजनन केंद्र में व्यवस्थित अनुकूलन और अवलोकन अवधि के बाद मुक्त किया गया। टैग लगाने की प्रक्रिया संबंधित संस्थाओं और वन विभाग के प्रतिनिधियों की उपस्थिति में वन्यजीव चिकित्सक की देखरेख में पूरी की गई। इसे मध्य भारत के विकसित होते गिद्ध परिदृश्य को समझने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया गया है।
लगभग डेढ़ वर्ष के काले गिद्ध को 19 दिसंबर 2025 को विदिशा जिले के सिरोंज से बचाया गया था। यह प्रजाति विश्व के सबसे बड़े उड़ने वाले पक्षियों में मानी जाती है और भारत में शीतकालीन आगंतुक के रूप में देखी जाती है।
वर्ष 2025 में विदिशा, मंडला, बैतूल और सिवनी जिलों से चार लंबे चोंच वाले गिद्धों को बचाया गया था। इनका उपचार और वैज्ञानिक निगरानी वन विहार राष्ट्रीय उद्यान में की गई। स्वास्थ्य परीक्षण के बाद इन्हें प्राकृतिक आवास में छोड़ने के लिए उपयुक्त पाया गया।
सभी गिद्धों पर उपग्रह संकेतक लगाए गए हैं, जिससे रिहाई के बाद उनकी गतिविधियों पर नजर रखी जा सकेगी। लंबे चोंच वाले गिद्धों की संख्या में पशुओं में प्रयुक्त डायक्लोफेनेक दवा के कारण भारी कमी आई थी और यह प्रजाति अंतरराष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ की गंभीर रूप से लुप्तप्राय श्रेणी में सूचीबद्ध है।
हाल ही में हुई गणना में कुल 1532 गिद्ध दर्ज किए गए, जो पिछले वर्ष की 951 संख्या की तुलना में 50 प्रतिशत से अधिक वृद्धि दर्शाते हैं। गणना के पहले दिन 1187 गिद्ध, दूसरे दिन 1306 और तीसरे दिन 1532 गिद्ध दर्ज किए गए। सर्वाधिक 899 गिद्ध रायसेन पश्चिम परिक्षेत्र में पाए गए, जो कुल संख्या का 60 प्रतिशत से अधिक है।
गणना के दौरान मध्यप्रदेश में पाई जाने वाली सातों गिद्ध प्रजातियां दर्ज की गईं। इनमें लंबे चोंच वाले, सफेद पृष्ठभाग वाले, हिमालयी, यूरेशियन, लाल सिर वाले और मिस्री गिद्ध शामिल हैं। भारत में गिद्धों की कुल नौ प्रजातियां पाई जाती हैं, जबकि विश्व में इनकी 23 प्रजातियां मौजूद हैं। वर्ष 2025 की गणना में मध्यप्रदेश में 12 हजार 710 गिद्ध दर्ज किए गए थे, जिसके आधार पर प्रदेश को देश का अग्रणी गिद्ध राज्य माना जाता है।
वन विभाग के अनुसार पुनर्वास, वैज्ञानिक निगरानी और दवाओं के नियमन जैसे प्रयासों से गिद्धों की संख्या में लगातार सुधार हो रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि गिद्ध प्राकृतिक पारितंत्र की स्वच्छता के महत्वपूर्ण प्रहरी हैं और उनकी बढ़ती संख्या पर्यावरण संतुलन के लिए सकारात्मक संकेत है।
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