लखनऊ , फरवरी 13 -- उत्तर प्रदेश विधानसभा में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कानून-व्यवस्था, धार्मिक परंपराओं और विपक्ष के रुख को लेकर तीखे बयान दिए। प्रयागराज में कुंभ मेले के दौरान हुई घटना पर बोलते हुए कहा कि हर व्यक्ति शंकराचार्य नहीं हो सकता और कोई भी कानून से ऊपर नहीं है।

विधानसभा में बोलते हुए मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि चार पीठों की परंपरा और वेदों की मर्यादा निर्धारित है, जिसे आदि जगद्गुरु आदि शंकराचार्य ने स्थापित किया था। नियमों का उल्लंघन स्वीकार नहीं किया जाएगा।

मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि धार्मिक आयोजनों में व्यवस्था और सुरक्षा सर्वोपरि है। जहां से श्रद्धालु स्नान कर बाहर निकल रहे हों, वहां कोई भी जिम्मेदार व्यक्ति ऐसा कदम नहीं उठा सकता जिससे भगदड़ की स्थिति बने। श्रद्धालुओं की जान से खिलवाड़ नहीं किया जा सकता। उन्होंने दोहराया कि सरकार कानून का पालन करना और करवाना दोनों जानती है।

उन्होने विपक्ष पर वातावरण खराब करने और लोगों को गुमराह करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि यदि सरकार पारदर्शी व्यवस्था लागू करना चाहती है तो उसमें बाधा नहीं डाली जानी चाहिए। समाजवादी पार्टी पर निशाना साधते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि जब उनको शंकराचार्य कहा जाता था, तब पूर्व में आपकी सरकार के दौरान वाराणसी में उनके साथ दुर्व्यवहार क्यों हुआ था।

दरअसल प्रयागराज में चल रहे माघ मेले में मौनी अमावस्या के अवसर पर पालकी पर बैठकर संगम स्नान करने जा रहे शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को रोके जाने पर हंगामा खड़ा हो गया था। शंकराचार्य के समर्थकों ने इस मामले का विरोध शुरू कर दिया। इसके बाद पुलिस के आलाधिकारियों के साथ धक्कामुक्की होने लगी। संगम तट पर करीब तीन घंटे तक खींचतान, धक्कामुक्की और हो-हल्ला चलता रहा। इसके बाद भी पुलिस-प्रशासन नहीं माना। इसके बाद शंकराचार्य बिना स्नान के वापस लौट गए थे।

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