नयी दिल्ली , जनवरी 09 -- शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शुक्रवार को कहा कि विकसित भारत का सपना तभी साकार हो सकता है जब देश के प्रत्येक बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त हो और बारहवीं कक्षा तक शत-प्रतिशत नामांकन हो।
श्री प्रधान ने आज यहां समग्र शिक्षा 3.0 पर हितधारकों के साथ 'रीइमेजिनिंग समग्र शिक्षा' नामक एक दिवसीय परामर्श बैठक की अध्यक्षता की। बैठक का उद्देश्य राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और विभिन्न क्षेत्रों के हितधारकों के साथ सहयोगात्मक विचार-विमर्श के माध्यम से समग्र शिक्षा 3.0 के लिए एक रणनीतिक, परामर्शपूर्ण और कार्यान्वयन योग्य रोडमैप विकसित करना है।
इस मौके पर केन्द्रीय शिक्षा मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 2047 तक विकसित भारत का दृष्टिकोण प्रस्तुत किया है, जो तभी साकार हो सकता है जब भारत के प्रत्येक बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त हो और देश में कक्षा बारहवीं तक शत-प्रतिशत नामांकन हो। उन्होंने जोर दिया कि शिक्षा के अंतर को कम करना, स्कूल छोड़ने वालों की संख्या घटाना, शिक्षा और पोषण के परिणामों में सुधार करना, शिक्षकों की क्षमता को मजबूत करना, महत्वपूर्ण कौशल को बढ़ावा देना और 'अमृत पीढ़ी' को मैकाले की मानसिकता से आगे ले जाना सामूहिक जिम्मेदारी है।
उन्होंने कहा कि इस विचार-विमर्श और साझा किए गए नवोन्मेषी विचारों से स्कूली शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने और समग्र शिक्षा को परिणामोन्मुखी, वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी, भारतीयता से ओतप्रोत और छात्रों की विविध आवश्यकताओं के प्रति संवेदनशील बनाने के लिए एक स्पष्ट रूपरेखा तैयार करने में मदद मिलेगी।
श्री प्रधान ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के लागू होने के पांच साल बाद, हम राष्ट्रीय विकास लक्ष्यों के अनुरूप शैक्षिक सुधार के एक नए चरण में प्रवेश कर रहे हैं। उन्होंने सभी हितधारकों से शैक्षणिक वर्ष 2026-27 के लिए एक सुदृढ़ और समग्र वार्षिक योजना तैयार करने और इसे राष्ट्रव्यापी आंदोलन के रूप में आगे बढ़ाने के लिए एकजुट होने का आग्रह किया।
इस अवसर पर कौशल विकास एवं उद्यमिता एवं शिक्षा राज्य मंत्री जयंत चौधरी ने कहा कि योजनाएँ तभी सबसे अधिक सफल होती हैं जब उन्हें विद्यालयों और राज्यों की वास्तविकताओं पर आधारित जमीनी स्तर के दृष्टिकोण से तैयार किया जाता है। उन्होंने कहा कि समग्र शिक्षा 3.0 इसी भावना का प्रतिनिधित्व करती है, जो राष्ट्रीय शिक्षा नीति की व्यापक और क्रियात्मक अभिव्यक्ति है, जहाँ विद्यालय परिवर्तन के सूत्रधार के रूप में कार्य करते हैं।
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