हल्द्वानी , नवंबर 02 -- उत्तराखंड किसान मंच ने कहा है कि सरकार को राइट टू हेल्थ बिल विधानसभा में पेश करना तथा मरीजों को मुफ्त स्वास्थ्य सुविधा मुहैय्या करानी चाहिए क्योंकि हर नागरिक को मुफ्त इलाज देना सरकार की जिम्मेदारी है।
प्रदेश की बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर किसान मंच उत्तराखंड ने सरकार पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। मंच ने हल्द्वानी में आयोजित एक प्रेस वार्ता में राज्य सरकार से जल्द से जल्द राइट टू हेल्थ बिल विधानसभा में पेश करने की मांग की है, ताकि हर नागरिक को स्वास्थ्य सेवा कानूनी अधिकार के रूप में सुनिश्चित हो सके।
मंच ने चेतावनी दी है कि यदि आगामी विधानसभा सत्र में यह बिल पेश नहीं किया गया, तो किसान मंच राज्यव्यापी आंदोलन शुरू करेगा।
किसान मंच के प्रदेश अध्यक्ष एवं ऑपरेशन स्वास्थ्य अभियान के जनक कार्तिक उपाध्याय ने कहा कि उत्तराखंड के अधिकांश सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र अब केवल 'रेफरल सेंटर' बनकर रह गए हैं। इन अस्पतालों में न तो पर्याप्त चिकित्सक हैं, न विशेषज्ञ डॉक्टर, न ही दवाइयों और उपकरणों की उपलब्धता है।
श्री उपाध्याय ने बताया कि चौखुटिया सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, जो 30 बिस्तरों वाला अस्पताल है, वहां केवल चार एमबीबीएस डॉक्टर तैनात हैं। विशेषज्ञ डॉक्टरों के अभाव में गंभीर मरीजों को रेफर करना पड़ता है और कई बार मरीज रास्ते में ही दम तोड़ देते हैं।
कैग रिपोर्ट के अनुसार राज्य के सीएचसी में डॉक्टरों की 94 प्रतिशत और उप-जिला अस्पतालों में 45 प्रतिशत तक की कमी है। ग्रामीण अंचलों में चिकित्सकों, उपकरणों और दवाओं का गहरा संकट बना हुआ है।
मंच ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 21 में जीवन के अधिकार को सुनिश्चित किया गया है, और सुप्रीम कोर्ट ने इसे "स्वस्थ जीवन जीने का अधिकार" माना है। इसलिए राज्य सरकार का दायित्व बनता है कि वह हर नागरिक को मुफ्त और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराए।
किसान मंच ने बताया कि ऑपरेशन स्वास्थ्य अभियान की शुरुआत चौखुटिया से की गई है, जिसे अब पूरे राज्य में फैलाया जाएगा। मंच ने सरकार को चेतावनी दी कि यदि राइट टू हेल्थ बिल जल्द विधानसभा में नहीं लाया गया, तो संगठन राज्यभर में व्यापक आंदोलन छेड़ेगा।
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