लखनऊ , मार्च 15 -- लखनऊ के ऐतिहासिक बड़ा इमामबाड़ा में डिजिटल क्रिएटर के घूमने पर आपत्ति जताने को लेकर सोशल मीडिया में वायरल वीडियो ने तूल पकड़ लिया है। मामले में हिजाब को लेकर उठे विवाद पर शिया धर्मगुरु मौलाना कल्वे जव्वाद ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि हर धार्मिक स्थल के अपने नियम और परंपराएं होती हैं और उनका सम्मान करना जरूरी है।

रविवार को मौलाना कल्वे जव्वाद ने कहा कि अगर कोई व्यक्ति इमामबाड़ा घूमने आता है तो उसे वहां की परंपराओं का पालन करना चाहिए। उनका कहना है कि कई मंदिरों में भी मुसलमानों के प्रवेश पर प्रतिबंध रहता है, जबकि इमामबाड़े में सभी को आने की अनुमति दी जाती है, लेकिन धार्मिक मर्यादाओं का पालन करना आवश्यक है। उनके अनुसार इमामबाड़ा एक धार्मिक स्थान है, इसलिए वहां बिना सिर ढके प्रवेश करने से रोकने का अधिकार प्रबंधन को है।

दरअसल, हाल ही में एक डिजिटल क्रिएटर मान्या सिंह का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है, जिसमें उन्होंने दावा किया है कि बड़ा इमामबाड़ा परिसर में उनसे हिजाब पहनने के लिए कहा गया और उनकी शर्ट का बटन बंद करने की भी सलाह दी गई। क्रिएटर के मुताबिक जब उन्होंने इन बातों का विरोध किया तो माहौल तनावपूर्ण हो गया और कुछ लोगों ने उन्हें बाहर जाने तक के लिए कह दिया।

मान्या सिंह ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में बताया कि वह अपने दोस्तों के साथ लखनऊ घूमने आई थीं और टिकट लेकर बड़ा इमामबाड़ा देखने गई थीं। उनका कहना है कि प्रवेश के समय किसी तरह के ड्रेस कोड की जानकारी नहीं दी गई, लेकिन अंदर पहुंचने पर उनसे सिर ढकने को कहा गया।

क्रिएटर के अनुसार जब उन्होंने हिजाब पहनने से इंकार किया तो वहां मौजूद कुछ लोगों ने उन्हें दुपट्टा लाकर सिर ढकने की सलाह दी। उनका यह भी आरोप है कि एक व्यक्ति ने उनसे शर्ट का बटन बंद करने को कहा, जिस पर उन्होंने आपत्ति जताई और इसे निजी स्वतंत्रता से जुड़ा मामला बताया।

वीडियो में मान्या सिंह ने यह भी दावा किया कि इमामबाड़ा परिसर के बाहर अमेरिका और इजरायल विरोधी पोस्टर लगे थे और कुछ लोगों ने उन्हें उन पोस्टरों पर पैर रखकर अंदर जाने के लिए कहा, जिसे उन्होंने करने से मना कर दिया।

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