चंडीगढ़ , जनवरी 08 -- हरियाणा सरकार ने राज्य सिविल सेवा (कार्यकारी शाखा) और संबद्ध सेवाओं की परीक्षा के पाठ्यक्रम में व्यापक संशोधन किया है। यह संशोधन उच्च प्रशासनिक पदों पर भर्ती प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, समसामयिक और प्रतिस्पर्धी बनाने के उद्देश्य से लागू किया गया है।

इसके तहत प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा की संरचना में महत्वपूर्ण बदलाव किये गये हैं।

प्रारंभिक परीक्षा अब दो वस्तुनिष्ठ प्रश्नपत्रों की होगी, जिनके कुल अंक 400 होंगे। पहला प्रश्नपत्र सामान्य अध्ययन पर आधारित होगा, जिसमें सामान्य विज्ञान, राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय समसामयिक घटनाएं, भारतीय इतिहास, स्वतंत्रता आंदोलन, भारतीय और विश्व भूगोल, भारतीय राजनीति, अर्थव्यवस्था, संस्कृति, तर्कशक्ति और मानसिक क्षमता से जुड़े विषय शामिल हैं। इसमें हरियाणा की अर्थव्यवस्था, समाज, संस्कृति और भाषा से संबंधित प्रश्न भी होंगे। दूसरा प्रश्नपत्र सिविल सेवा योग्यता परीक्षा का होगा, जिसमें अभिरुचि, संप्रेषण कौशल, तार्किक तर्क, निर्णय क्षमता, समस्या समाधान, सामान्य मानसिक योग्यता, कक्षा दसवीं स्तर की अंकगणित तथा डेटा व्याख्या से जुड़े प्रश्न पूछे जाएंगे।

मुख्य लिखित परीक्षा में अब छह वर्णनात्मक प्रश्नपत्र होंगे। प्रत्येक प्रश्नपत्र तीन घंटे का और 100 अंकों का होगा, कुल 600 अंक निर्धारित किए गए हैं। इस नये ढांचे में वैकल्पिक विषयों को समाप्त कर दिया गया है और चार सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र शामिल किये गये हैं। अंग्रेजी और हिंदी के प्रश्नपत्रों में भाषा ज्ञान, अनुवाद, लेखन क्षमता और निबंध लेखन का मूल्यांकन किया जाएगा।

सामान्य अध्ययन के चारों प्रश्नपत्रों में भारतीय इतिहास, कला और संस्कृति, भारतीय संविधान और शासन व्यवस्था, सामाजिक-आर्थिक विकास, कृषि, विज्ञान-प्रौद्योगिकी, पर्यावरण, आंतरिक सुरक्षा, अंतरराष्ट्रीय संबंध, नैतिकता, सत्यनिष्ठा और प्रशासनिक आचरण जैसे विषय शामिल किये गये हैं। इनमें हरियाणा से संबंधित मुद्दों पर भी विशेष फोकस रहेगा।

सरकार का मानना है कि यह संशोधित पाठ्यक्रम प्रशासनिक सेवाओं के लिए अधिक सक्षम, नैतिक और समसामयिक दृष्टिकोण रखने वाले अधिकारियों के चयन में सहायक सिद्ध होगा।

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