चंडीगढ़ , दिसंबर 11 -- हरियाणा में सरकारी डॉक्टरों की जारी हड़ताल चौथे दिन भी जारी है, इसी बीच सरकार ने गुरुवार अपराह्न चार बजे चंडीगढ़ में डॉक्टरों को बैठक के लिए बुलाया है। सरकार ने बुधवार को डॉक्टरों की चार में से तीन प्रमुख मांगें मान ली थीं, जिसके बाद बातचीत का रास्ता खुला है।
सरकार की ओर से रियायतें देने के बाद पंचकूला में पुलिस प्रदर्शन स्थल पर पहुंची और धरना समाप्त करने की अपील की। पुलिस ने कहा कि केवल तीन प्रतिनिधि धरने पर बैठें और बाकी डॉक्टर सेवाएं बहाल करें। डॉक्टरों ने बैठक होने तक हालांकि धरना जारी रखने का फैसला किया।
इसी दौरान पंचकूला पुलिस और हरियाणा सिविल मेडिकल सर्विसेज एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राजेश ख्यालिया के बीच तीखी नोकझोंक भी हुई। डॉक्टरों ने स्पष्ट कर दिया कि जब तक वार्ता नहीं होती, धरना नहीं हटेगा।
इससे पहले सरकार हड़ताली डॉक्टरों पर एस्मा लागू कर चुकी है। आदेश में हड़ताल पर रोक लगाते हुए चेतावनी दी गई है कि ड्यूटी पर न लौटने वालों की सैलरी रोकी जा सकती है। सरकार हड़ताल कर रहे डॉक्टरों की सूची भी तैयार कर रही है।
उधर, हड़ताल का मामला पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय पहुंच गया है। याचिकाकर्ता अरविंदर सेठ ने कहा है कि सरकारी अस्पताल स्वास्थ्य व्यवस्था की रीढ़ हैं और सेवाएं बंद होने से जनता गंभीर परेशानी झेल रही है। अदालत में इस पर आज ही सुनवाई होनी है।
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, नौ दिसंबर को लगभग 70 हजार मरीजों ने ओपीडी सेवाएं लीं। 2,433 मरीजों को भर्ती किया गया, 202 सर्जरी की गईं और 1,498 मरीजों को आपातकालीन सेवाएं प्रदान की गईं। 320 प्रसव हुए, 1.86 लाख से अधिक मरीजों को दवाएं दी गईं और 56 पोस्टमॉर्टम किए गए।
हड़ताल के असर को कम करने के लिए सरकार ने बुधवार को 2,531 विकल्प डॉक्टरों की तैनाती की। इसी दौरान 74 डॉक्टरों ने अपनी ड्यूटी दोबारा जॉइन भी की। अब सभी की नजरें सरकार और डॉक्टरों के बीच होने वाली अहम बैठक और उच्च न्यायालय की सुनवाई पर टिकी हैं, जो इस गतिरोध के भविष्य का फैसला करेगी।
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