चंडीगढ़ , फरवरी 25 -- हरियाणा में भष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने राज्य सरकार के विभिन्न विभागों के खातों से जुड़े 590 करोड़ रुपये के गबन मामले में बैंक अधिकारियों समेत चार लोगों को गिरफ्तार किया है।
एसीबी प्रमुख ए.एस. चावला ने बुधवार को पंचकूला में संवाददाताओं को बताया कि आईडीएफसी बैंक और एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक में सरकारी विभागों के खातों से पैसा अवैध रूप से निजी बैंक खातों में भेजा गया।
इस घटना के बाद राज्य सरकार ने आईडीएफसी फर्स्ट बैंक को अपने पैनल से हटाने की कार्रवाई शुरू कर दी है। हालांकि बैंक ने एक बयान में कहा है कि उसने त्वरित कदम उठाते हुए "हरियाणा सरकार के संबंधित विभागों द्वारा दावा की गई मूल राशि और ब्याज का पूरा भुगतान कर दिया है, जिसकी कुल राशि 583 करोड़ रुपये है"।
हेराफेरी की जानकारी मिलने के बाद 11 फरवरी को एक आंतरिक जांच समिति बनायी गयी थी। उसकी रिपोर्ट में घोटाले की पुष्टि होने के बाद एसीबी ने 23 फरवरी को पंचायत विभाग की शिकायत पर मामले की जांच शुरू की, जिसके आधार पर प्राथमिकी दर्ज की गयी।
गिरफ्तार आरोपियों में आईडीएफसी बैंक के प्रबंधक रिभव ऋषि और रिलेशनशिप मैनेजर अभय शामिल हैं, जिन्हें इस घोटाले का मुख्य साजिशकर्ता बताया जा रहा है। इसके अलावा अभय की पत्नी स्वाति सिंगला, जो एक निजी फर्म की मालिक हैं, और उनके भाई अभिषेक को भी गिरफ्तार किया गया है। जांच में सामने आया कि करीब 300 करोड़ रुपये 'स्वास्तिक देश प्रोजेक्ट' नामक खाते में ट्रांसफर किये गये थे।
प्रारंभिक जांच के अनुसार, गबन की राशि आईडीएफसी बैंक और एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक के माध्यम से स्थानांतरित की गयी। बताया गया कि वित्त विभाग को जुलाई 2025 में ही अनियमितताओं की आशंका के बारे में आगाह किया गया था, लेकिन औपचारिक जांच हाल ही में शुरू हुई। मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्यपाल ने वित्त विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव अरुण कुमार गुप्ता की अध्यक्षता में उच्च स्तरीय जांच समिति गठित की है।
समिति में पंचायत विभाग के निदेशक अनीश यादव, पंचकूला नगर निगम आयुक्त विनय कुमार और एचपीएससी के उप सचिव सतीश कुमार शामिल हैं। समिति को एक माह में रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिये गये हैं।
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