चंडीगढ़ , मार्च 31 -- हरियाणा में एक अप्रैल 2026 से लागू होने जा रही नयी कलेक्टर दरों को तय करने की प्रक्रिया में वैधानिक व्यवस्था के अभाव पर पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के एडवोकेट हेमंत कुमार ने गहरी चिंता जताई है।
श्री हेमंत कुमार ने मंगलवार को राज्यपाल, मुख्यमंत्री, राजस्व मंत्री सहित वरिष्ठ अधिकारियों और सभी मंडल आयुक्तों और उपायुक्तों को ज्ञापन भेजा। ज्ञापन में उन्होंने बताया कि हरियाणा में हर साल कलेक्टर दरें तय की जाती हैं, लेकिन हरियाणा स्टांप (अंडर-वैल्यूएशन की रोकथाम) नियम, 1978 में इसके लिए कोई स्पष्ट प्रक्रिया निर्धारित नहीं है।
कलेक्टर रेट भूमि और संपत्ति के न्यूनतम सरकारी मूल्य होते हैं, जिनके आधार पर स्टांप ड्यूटी तय होती है। यह राजस्व और प्रॉपर्टी बाजार दोनों के लिए अहम होता है।
एडवोकेट ने पंजाब का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां 1983 के नियमों में संशोधन कर कलेक्टर रेट तय करने की विस्तृत प्रक्रिया लागू है, जिसमें विभिन्न मानकों और विशेषज्ञों की राय शामिल होती है। इसके विपरीत हरियाणा में प्रक्रिया स्पष्ट न होने से पारदर्शिता की कमी और विवाद की संभावना बनी रहती है।
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