चंडीगढ़ , नवंबर 12 -- हरियाणा सरकार ने औद्योगिक प्रक्रियाओं को और अधिक सरल एवं पारदर्शी बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए अब स्वचालित नवीनीकरण प्रणाली को 15 वर्ष तक के लिए लागू कर दिया है, जिससे उद्योगों को बार-बार नवीनीकरण की झंझट से राहत मिलेगी।
आधिकारिक जानकारी के अनुसार इसके साथ ही, 734 गैर-प्रदूषणकारी उद्योगों को 'व्हाइट कैटेगरी' में पुनः वर्गीकृत करते हुए नियमित निरीक्षणों से छूटदी गयी है। अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए सेल्फ सर्टिफिकेशन और थर्ड पार्टी वेरिफिकेशन प्रणाली लागू की गयी है, जिससे पारदर्शिता और दक्षता दोनों में वृद्धि हुई है।
सभी प्रमुख सेवाएं अब नेशनल सिंगल विंडो सिस्टम से जुड़ीं उद्योग एवं वाणिज्य विभाग ने राज्य की सभी प्रमुख सेवाओं को नेशनल सिंगल विंडो सिस्टम से एकीकृत कर दिया है। इससे निवेशकों को सभी अनुमतियां, लाइसेंस और प्रोत्साहन एक ही मंच पर प्राप्त होंगे।
हरियाणा ने जन विश्वास अधिनियम के अनुरूप अपना स्वयं का ढांचा भी लागू किया है। इसके तहत छोटे व्यावसायिक अपराधों को अपराध की श्रेणी से हटाकर सिविल दंड व्यवस्था में शामिल किया गया है, जिससे उद्योगों को राहत मिलेगी।
एआईआधारित चैटबॉट और ऑनलाइन डैशबोर्ड से बढ़ी पारदर्शिता अनुमतियों और शिकायत निवारण के लिए राज्य सरकार ने ऑनलाइन डैशबोर्ड तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित चैटबॉट भी शुरू किये हैं। इन तकनीकी नवाचारों से अनुमोदन प्रक्रिया और अधिक तेज और पारदर्शी हो गयी है।
डीपीआईआईटी रिपोर्ट में हरियाणा को उच्च स्थान औद्योगिक एवं आंतरिक व्यापार संवर्द्धन विभाग की हालिया मूल्यांकन रिपोर्ट में अनुपालन और गति के मामले में हरियाणा को उच्च स्थान प्राप्त हुआ है, जो राज्य की उद्योग हितैषी नीतियों की पुष्टि करता है।
बैठक में गृह विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. सुमिता मिश्रा, हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अध्यक्ष विनीत गर्ग, नगर एवं ग्राम आयोजना विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव ए.के. सिंह और उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के आयुक्त एवं सचिव डॉ. अमित कुमार अग्रवाल सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
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