चंडीगढ़ , अप्रैल 02 -- हरियाणा के स्वास्थ्य सेवा महानिदेशक ने राज्य के सभी सिविल सर्जनों और प्रधान चिकित्सा अधिकारियों को निर्देश जारी करते हुए कहा है कि जिला सिविल अस्पतालों में सीटी स्कैन और एमआरआई सेवाओं का व्यवस्थित रिकॉर्ड रखना अनिवार्य होगा।
गुरुवार को जारी निर्देशों में कहा गया है कि पीपीपी (पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप) मॉडल के तहत संचालित इन सेवाओं में पारदर्शिता और सुचारू संचालन सुनिश्चित किया जाए। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2016 से राज्य के सिविल अस्पतालों में यह सेवाएं पीपीपी मोड पर चल रही हैं, जिनसे प्रतिदिन बड़ी संख्या में मरीज लाभान्वित हो रहे हैं।
सरकार द्वारा बीपीएल कार्डधारकों, दिव्यांग पेंशनधारकों, अनुसूचित जाति, आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस), अज्ञात दुर्घटना पीड़ितों, सरकारी कर्मचारियों, पेंशनभोगियों और एचआईवी पीड़ितों को यह सुविधाएं निःशुल्क उपलब्ध कराई जा रही हैं।
स्वास्थ्य सेवा महानिदेशक ने स्पष्ट किया कि दुरुपयोग रोकने के लिए पात्र मरीजों के लिए इनडोर या डे-केयर फाइल बनाना जरूरी होगा। साथ ही, मरीज का पूरा चिकित्सीय इतिहास, आवश्यक जांच, प्रयोगशाला रिपोर्ट और मरीज की सहमति संबंधित फाइल में दर्ज की जाए।
इसके अलावा, रेजिडेंट मेडिकल ऑफिसर को निर्देश दिए गए हैं कि वे रोजाना इन परीक्षणों से जुड़े आदेशों की समीक्षा करें और यह सुनिश्चित करें कि सभी दस्तावेजों पर मेडिकल सुपरिटेंडेंट या प्रिंसिपल मेडिकल ऑफिसर के हस्ताक्षर हों।
स्वास्थ्य सेवाओं के महानिदेशक ने सभी अधिकारियों को निर्देशों का कड़ाई से पालन करने और इन्हें तत्काल प्रभाव से लागू करने के निर्देश दिए हैं।
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