करनाल , फरवरी 05 -- हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा है कि प्रदेश की जेलों में बंदियों के प्रवेश से लेकर रिहाई तक की पूरी प्रक्रिया, रहन-सहन, खान-पान, मुलाकात, चिकित्सा सुविधा, अदालत में पेशी और केंटीन व्यवस्था को पूरी तरह कम्प्यूटरीकृत किया गया है। जेलों को अब केवल दंड का नहीं, बल्कि सुधार और पुनर्वास का केंद्र बनाया जा रहा है।
श्री सैनी कहा कि बंदियों को शिक्षा और कौशल से जोड़ने के लिए जेलों में कौशल विकास के कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। पांच जेलों में औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आईटीआई) डिप्लोमा और पॉलिटेक्निक कोर्स शुरू किए गए हैं। कौशल प्राप्त कर चुके बंदियों को सजा पूरी होने के बाद हरियाणा कौशल रोजगार निगम के माध्यम से रोजगार दिलाने के लिए समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किये गये हैं। बंदियों के रोजगार सृजन के उद्देश्य से प्रदेश की आठ जेलों में पेट्रोल पंप खोले जा चुके हैं, जबकि अगले माह तक चार और जेलों में पेट्रोल पंप शुरू किए जाएंगे।
उन्होंने बताया कि केंद्रीय जेल अंबाला, केंद्रीय जेल-1 हिसार तथा जिला जेल फरीदाबाद, पानीपत, गुरुग्राम, करनाल, झज्जर, रोहतक, यमुनानगर और कुरुक्षेत्र में जेल रेडियो स्टेशन संचालित किए जा रहे हैं। प्रदेश की जेलों में 335 वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग सिस्टम स्थापित किए गए हैं, जिनके माध्यम से बंदियों की ऑनलाइन कोर्ट पेशी करवाई जा रही है। सभी जेलों में पुस्तकालय स्थापित किए गए हैं। गंभीर अपराधों में शामिल बंदियों के लिए रोहतक में अत्याधुनिक उच्च सुरक्षा जेल का निर्माण अंतिम चरण में है।
मुख्यमंत्री ने नव-प्रशिक्षित अधिकारियों से अपील की कि वे सत्यनिष्ठा, अनुशासन और कर्तव्य को सर्वोपरि रखें। उन्होंने कहा कि कानून का पालन करते हुए संवेदनशीलता और करुणा को अपने व्यवहार का आधार बनाएं। तकनीक, नियमों की जानकारी और मानवीय मूल्यों की समझ एक उत्कृष्ट कारागार अधिकारी की पहचान है।
इस अवसर पर सहकारिता, कारागार, निर्वाचन, विरासत एवं पर्यटन मंत्री डॉ. अरविन्द कुमार शर्मा ने कहा कि जेल केवल दंड का स्थान नहीं, बल्कि सुधार और पुनर्निर्माण का अहम केंद्र है। एक जेल अधिकारी की भूमिका प्रहरी के साथ-साथ मार्गदर्शक और शिक्षक की भी होती है। सख्ती और संवेदनशीलता के संतुलन से ही कारागार व्यवस्था को प्रभावी बनाया जा सकता है।
कारागार विभाग के महानिदेशक आलोक मित्तल ने कहा कि करनाल स्थित नव-निर्मित जेल प्रशिक्षण अकादमी से प्रशिक्षुओं की पहली दीक्षांत परेड विभाग के आधुनिकीकरण की दिशा में ऐतिहासिक कदम है। उन्होंने बताया कि जेलों की सुरक्षा को मजबूत करने के लिए 1500 सीसीटीवी कैमरे, वी-कवच सिस्टम, बैगेज स्कैनर और अन्य आधुनिक उपकरण लगाए गए हैं। वर्तमान में 82 प्रतिशत बंदियों की पेशी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से हो रही है, जिसे दो माह में 90 प्रतिशत तक पहुंचाने का लक्ष्य है।
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