श्रीगंगानगर , जनवरी 09 -- राजस्थान में सीमावर्ती इलाकों में ईंट भट्टा उद्योग पड़ोसी हरियाणा और पंजाब की लचीली नीतियों के चलते संकट के दौर से गुजर रहा है।
इसकी वजह से आर्थिक मार झेल रहे हनुमानगढ़ जिले के नोहर शहर में ईंट भट्टा यूनियन ने ईटों की कीमत कम करने का निर्णय लिया है। इस सम्बन्ध में गुरुवार को ईंट भट्टा उद्योग संचालकों की बैठक में हुई, जिसमें नये सीजन के लिए प्रति एक हजार ईंटों की कीमत 5200 रुपये तय करने का फैसला किया। यह पिछले सीजन के छह हजार रुपये की ऊंची दरों से कम है, लेकिन संचालकों का कहना है कि यह कदम बाजार की वास्तविकताओं को ध्यान में रखतेहुए उठाया गया है, ताकि प्रतिस्पर्धा बनी रहे।
लक्ष्मीनारायण सहारण के नेतृत्व में आयोजित बैठक में संजय मोदी, बलवीर सुथार, लूणाराम सहू, भादर खाती, भीम गोल्याण, विशाल पांडिया, मकबूल मुल्तानी, अजय खोखा और छोटू गर्ग सहित कई संचालक मौजूद रहे। बैठक में चर्चा का केंद्र बिंदु सरकार की सख्त प्रदूषण नीति रही, जो वर्ष में सिर्फ छह महीने ही ईंट भट्ठे चलाने की अनुमति देती है।
संचालकों ने शिकायत की कि इससे उनका कारोबार आधा रह गया है। ऊपर से रॉयल्टी की दरें हर वर्ष बढ़ रही हैं और अब 18 प्रतिशत वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) का बोझ भी डाल दिया गया है। एक संचालक ने कहा- हरियाणा और पंजाब में न रॉयल्टी है न ही समय की पाबंदी। वहां पूरे वर्ष भट्टे धधकते रहते हैं। इससे हमारी ईंटें महंगी पड़ती हैं और बाजार छिनता जा रहा है।
संचालकों ने एकजुट होकर मांग पत्र तैयार करने का ऐलान किया, जिसमें रॉयल्टी घटाने, जीएसटी हटाने और पड़ोसी राज्यों में भी छह महीने की सीमा लागू करने की गुहार लगायी है। उनका तर्क है कि प्रदूषण रोकने का नियम अगर सबके लिए बराबर हो, नहीं तो यह स्थानीय उद्योग को तबाह कर देगा।
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