हरिद्वार , मार्च 04 -- उत्तराखंड की तीर्थ नगरी हरिद्वार में होली का पर्व इस वर्ष बड़े ही हर्षोल्लास और शांति के साथ मनाया गया। गंगा घाटों से लेकर गली-मोहल्लों तक लोगों ने एक-दूसरे को रंग लगाकर, गले मिलकर प्रेम और भाईचारे का संदेश दिया। होलियारों की टोलियां ढोल-मंजीरों के साथ होली के गीत गाती हुई शहर भर में उत्साह बिखेरती रहीं।

वहीं पतंजलि योगपीठ में बाबा रामदेव ने फूलों की होली खेलते हुए देश और दुनिया को शांति का संदेश दिया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि होली सृष्टि के आदिकाल से वसंत ऋतु के आगमन और नवसृष्टि का प्रतीक पर्व है। यह केवल रंगों का त्योहार नहीं, बल्कि ज्ञान, भक्ति, प्रेम, मानवता और नैतिक मूल्यों का उत्सव है।

उन्होंने वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आज दुनिया के कई हिस्सों में रंगों की नहीं, बल्कि खून की होली खेली जा रही है। विशेषकर इजरायल, अमेरिका और पूरे मध्य पूर्व में जारी संघर्ष तथा यूक्रेन-रूस युद्ध मानवता के लिए चिंता का विषय है। उन्होंने इन युद्धों को "अज्ञान और अहंकार" की लड़ाई बताते हुए कहा कि कुछ महाशक्तियां अपने वर्चस्व को बनाए रखने के लिए दुनिया को संघर्ष की आग में झोंक रही हैं, जिससे तीसरे विश्व युद्ध का खतरा भी मंडरा रहा है।

उन्होंने निर्दोष बच्चों, माताओं और नागरिकों की मौत पर गहरा दुख व्यक्त किया और धार्मिक नेताओं-शिया, सुन्नी गुरुओं तथा पोप-से एकजुट होकर शांति स्थापित करने का आह्वान किया। उन्होंने यह भी कहा कि यदि दुनिया सच में लोकतांत्रिक और मानवीय मूल्यों को समझे, तो सभी हथियारों, विशेषकर परमाणु हथियारों का पूर्ण उन्मूलन होना चाहिए।

बाबा रामदेव ने अमेरिका के डॉलर वर्चस्व की राजनीति को भी वैश्विक तनाव का एक कारण बताते हुए विश्व को परमाणु मुक्त बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि होली का सच्चा संदेश यही है कि द्वेष और हिंसा को त्यागकर प्रेम, सद्भाव और मानवता के रंगों से पूरी दुनिया को रंगा जाए।

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