हरिद्वार , मार्च 11 -- उत्तराखंड राज्य महिला आयोग द्वारा चलाए जा रहे महिला आयोग आपके द्वार अभियान के अंतर्गत बुधवार को हरिद्वार के जिलाधिकारी सभागार में जनसुनवाई की गई। कार्यक्रम की अध्यक्षता आयोग की अध्यक्ष कुसुम कंडवाल ने की। इस दौरान आयोग की सदस्य विमला नैथानी और कमला जोशी भी मौजूद रहीं।

जनसुनवाई में कुल 18 महिलाओं ने अपनी समस्याएं आयोग के समक्ष रखीं। इनमें से कई मामलों का मौके पर ही समाधान किया गया जबकि चार गंभीर मामलों को आगे की कार्रवाई के लिए देहरादून स्थित आयोग मुख्यालय भेजा गया।

सुनवाई के दौरान हरिद्वार के एक निजी अस्पताल में कार्यरत दो महिला चिकित्सकों ने बताया कि अस्पताल प्रबंधन द्वारा पिछले करीब एक वर्ष नौ माह से उनका वेतन रोका गया है। इस पर अध्यक्ष कुसुम कंडवाल ने अस्पताल प्रबंधन को निर्देश दिया कि 16 मार्च को आयोग के समक्ष उपस्थित होकर एक सप्ताह के भीतर दोनों चिकित्सकों का बकाया वेतन चेक के माध्यम से भुगतान किया जाए।

इसके अलावा एक महिला द्वारा पति पर अतिरिक्त संबंध और दहेज उत्पीड़न का आरोप लगाने के बाद जांच के आदेश दिए गए और दोनों पक्षों को आयोग में तलब किया गया। वहीं एक विधवा महिला द्वारा अपने जेठ पर संपत्ति हड़पने का आरोप लगाए जाने पर जिलाधिकारी हरिद्वार को पीड़िता को उसके हिस्से का कब्जा दिलाने के लिए आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए।

मनसा देवी मंदिर मार्ग से दुकान हटाए जाने से प्रभावित महिलाओं की आजीविका के मामले में नगर निगम को उन्हें अन्य उचित स्थान पर दुकान उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए। साथ ही एक पीड़िता को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के माध्यम से निशुल्क अधिवक्ता भी उपलब्ध कराया गया।

अध्यक्ष कंडवाल ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि महिला आयोग के निर्देशों को गंभीरता से लिया जाए और पुलिस विभाग आयोग द्वारा भेजे गए मामलों की जांच रिपोर्ट समय पर उपलब्ध कराए। उन्होंने कहा कि महिलाओं की समस्याओं का समाधान शासन-प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।

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