हरिद्वार , अक्टूबर 22 -- त्तराखंड के हरिद्वार में बुधवार को गोवर्धन पूजा के अवसर पर अनेक स्थानों पर गोवर्धन पूजा का पर्व मनाया गया है शहर के विभिन्न भगवान राधा कृष्ण के मंदिरों में विशेष पूजा की गई । मंदिरों को सजाया गया है तथा गाय के गोबर से गोवर्धन पर्वत की प्रतिमा बनाकर उसका पूजन भी किया जा रहा है इसके साथ ही भगवान कृष्ण को 56 प्रकार के व्यंजनों का भोग भी लगाया गया है lकनखल स्थित राधा कृष्ण मंदिर के पुजारी प्रणव शर्मा का कहना है कि गोवर्धन पूजा की परंपरा ब्रज मंडल से जुड़ी है पौराणिक कथाओं के अनुसार गोकुल वासियों द्वारा गोवर्धन पर्वत व गायों की पूजा करने से इंद्रदेव रूष्ट हो गए और उन्होंने भारी वर्षा आरंभ कर दी तब भगवान कृष्ण ने अपनी छोटी उंगली से गोवर्धन पर्वत को उठा लिया था और गोकुल वासियों की इंद्र के प्रकोप से रक्षा की थी।

तब राजा इंद्र ने भगवान से क्षमा याचना की थी तब से गोवर्धन पूजा मानने की परंपरा है उन्होंने बताया कि आज के दिन भक्तगण गाय के गोबर से गोवर्धन पर्वत की आकृति बनाते हैं और गोवर्धन पर्वत की पूजा की जाती है और गायों को भी पूजा जाता है उन्होंने कहा कि यह परंपरा उनके मंदिर में वर्षों से चली जा रही है कनखल का राधा कृष्ण मंदिर बहुत ही प्राचीन मंदिर है इसकी भक्तों में काफी मानता है ।

महानिर्वाणी अखाड़े के महंत रवींद्र पुरी महाराज का कहना है कि गोवर्धन पूजा का पर्व अपने आप में एक अलौकिक पर्वत है भगवान कृष्ण विष्णु का ही अवतार माने जाते हैं और समस्त उत्तर भारत में यह त्यौहार बड़े ही हर्षालस के साथ मनाया जाता है गोवर्धन पूजा का पर्व इंद्रदेव के घमंड को दूर करने वाली कथा से जुड़ा हुआ है और आज भी कहीं पर अतिवृष्टि की संभावना होती है या अतिवृष्टि होती है तो लोग गोवर्धन पर्वत की सांकेतिक पूजा करते हैं जिससे , माना जाता है कि इंद्रदेव के प्रकोप से छुटकारा मिलता है उन्होंने कहा कि आज के दिन गायों की भी पूजा कर की जाती है।

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