नयी दिल्ली , नवंबर 06 -- देश के विमानन क्षेत्र में जारी तेज वृद्धि के साथ इससे होने वाले प्रदूषण को कम करने के लिए सरकार जल्द ही हरित विमान ईंधन नीति जारी करेगी।

नागरिक उड्डयन मंत्री के. राम मोहन नायडू ने यहां गुरुवार को उद्योग संगठन फिक्की द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में कहा कि हरित विमान ईंधन पर नीति निर्माण की दिशा में काफी कार्य हो चुका है और सरकार जल्द ही सभी संबंधित हितधारकों के साथ विचार-विमर्श के बाद हरित ईंधन नीति जारी करेगी।

उन्होंने कहा कि भारत इस समय 15 प्रतिशत विमान ईंधन का निर्यात करता है। इसी तरह के अवसर हरित विमान ईंधन में भी भारत के लिए उपलब्ध होने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि हाल ही में सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनी इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन ने हरित विमान ईंधन का उत्पादन शुरू किया है। मंत्रालय इसका विस्तार सार्वजनिक कंपनियों के अलावा निजी कंपनियों तक करना चाहता है ताकि हरित विमान ईंधन के आंदोलन को गति मिल सके।

श्री नायडू ने उन्होंने कहा कि वर्ष 2030 तक देश में 1.5 से 1.6 करोड़ टन विमान ईंधन की मांग रहने की संभावना है जो साल 2040 तक बढ़कर 3.5 से 3.2 करोड़ टन तक हो जायेगी। इसके साथ ही इससे होने वाला कार्बन उत्सर्जन भी बढ़ेगा। इसलिए, जरूरी है कि भारत हरित विमान ईंधन को अपनाने की ओर तेजी से कदम बढ़ाये।

कार्यक्रम के दौरान केपीएमजी की एक रिपोर्ट जारी की गई। इसके अलावा एयरबस और गति शक्ति विश्वविद्यालय ने एक संयुक्त अध्ययन समझौते पर भी हस्ताक्षर किये।

कार्यक्रम में नागर विमानन महानिदेशक फ़ैज़ अहमद किदवई भी मौजूद थे।

भारत और दक्षिण एशिया में एयरबस के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक योर्गन वेस्टमायर ने कहा कि भारत के लिए हरित विमान ईंधन न सिर्फ अर्थव्यवस्था को गति देने वाला है बल्कि इसका सामाजिक-आर्थिक महत्व भी है। एक तरफ इससे कृषि क्षेत्र के लिए अपशिष्ट निपटान की समस्या समाप्त हो जायेगी और दूसरी तरफ वर्ष 2030 तक 11 से 14 लाख लोगों को रोजगार मिलेगा। उन्होंने इसमें सभी हितधारकों के सहयोग की अपील की।

उल्लेखनीय है कि भारत ने साल 2027 तक एक प्रतिशत हरित विमान ईंधन के इस्तेमाल का लक्ष्य रखा है। इसे बढ़ाकर साल 2028 तक दो प्रतिशत और 2030 तक पांच प्रतिशत पर ले जाने का लक्ष्य है।

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