हरदोई , फरवरी 24 -- उत्तर प्रदेश के हरदोई स्थित डॉ. राम मनोहर लोहिया महाविद्यालय, अल्लीपुर के तत्वावधान में स्वामी विवेकानंद सभागार में 'भारतीय साहित्य में राम तत्व' विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का भव्य आयोजन किया गया। संगोष्ठी में देश-प्रदेश के साहित्यकारों, भाषाविदों, शिक्षाविदों और समाज चिंतकों ने भाग लेकर भारतीय वाङ्मय में भगवान श्रीराम के आदर्शों, जीवन-दर्शन और साहित्यिक सर्वव्यापकता पर विचार-विमर्श किया।

कार्यक्रम का शुभारंभ श्रीराम दरबार की महाआरती एवं दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। वैदिक मंत्रोच्चार और शंखध्वनि के बीच सभागार का वातावरण भक्तिमय हो उठा। विद्यालय के छात्र-छात्राओं ने 'निषादराज मिलन', 'केवट प्रसंग' और 'भरत मिलाप' जैसे प्रसंगों पर आधारित मनमोहक झांकी प्रस्तुत कर सामाजिक समरसता और मानवीय मूल्यों का संदेश दिया।

मुख्य अतिथि के रूप में पधारे लखनऊ विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. सूर्य प्रकाश दीक्षित ने अपने शोधपरक उद्बोधन में कहा कि राम केवल धार्मिक या ऐतिहासिक व्यक्तित्व नहीं, बल्कि भारतीय साहित्य की चेतना हैं। उन्होंने रामचरितमानस के साहित्यिक पक्षों का विश्लेषण करते हुए कहा कि गोस्वामी तुलसीदास ने राम के माध्यम से समाज को समन्वय का संदेश दिया।

विशिष्ट अतिथि बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय के डॉ. देवी प्रसाद तिवारी ने रामकथा को राष्ट्रीय एकता का सूत्र बताते हुए कहा कि आधुनिक युग में राम के आदर्श युवा पीढ़ी के लिए पथप्रदर्शक हैं।

मुख्य वक्ता शिक्षा एवं संस्कृति उत्थान न्यास (अवध प्रांत) के श्री ज्ञान पांडेय ने शिक्षा और चरित्र निर्माण में राम तत्व की प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि साहित्य में राम का चरित्र जीवन मूल्यों का सर्वोत्तम पाठ है।

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