नयी दिल्ली , फरवरी 05 -- कांग्रेस अध्यक्ष तथा राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने गुरुवार को कहा कि विपक्षी दल राज्यसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जवाब सुनना चाहते थे लेकिन भाजपा के लोगों ने सदन में कांग्रेस के उन नेताओं का अपमान किया है जिन्होंने आधुनिक भारत की नींव रखी है।

उन्होंने कहा कि आश्चर्य इस बात का है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपमान करने वालों को रोकने का प्रयास तक नहीं किया।

श्री खरगे ने राज्यसभा में श्री मोदी के राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव का जवाब देने के बाद संसद भवन परिसर में पत्रकारों से कहा कि भाजपा के लोगों ने पूर्व पंडित जवाहर लाल नेहरू तथा इंदिरा गांधी जैसे नेताओं का जिस तरह से अपमान किया है कांग्रेस उसकी निंदा करती है। उनका कहना था कि लोकसभा में चार दिन से गतिरोध चल रहा है और वहां विपक्ष के नेता को बोलने नहीं दिया जा रहा है। उनका कहना था कि विपक्ष प्रधानमंत्री का जवाब सुनना चाहता था लेकिन सरकार दो मिनट विपक्ष की बात सुनने को तैयार नहीं हुई इसलिए सभी दलों ने प्रधानमंत्री के जवाब के समय सदन से बहिर्गमन करने का निर्णय लिया।

राज्यसभा में विपक्ष के नेता ने कहा "हम उन्हें सुनना चाहते थे। हालांकि, पिछले चार दिनों से हम देख रहे हैं कि लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को बोलने नहीं दिया जा रहा है। अगर उन्होंने मेरी बात सिर्फ दो मिनट के लिए भी सुन ली होती, तो यह पूरी समस्या हल हो सकती थी। लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया और लगता है कि उनका ऐसा करने का कोई इरादा भी नहीं था। हमारी पार्टी के महान नेताओं ने इस देश के लिए महान बलिदान दिए। उन्होंने देश के लिए लड़ाई लड़ी, जेल गए और भारत की स्वतंत्रता हासिल करने के लिए अंग्रेजों के खिलाफ संघर्ष किया।"उन्होंने कहा, "अगर हमें बोलने ही नहीं दिया जाता, तो बीच-बीच में सकारात्मक टिप्पणी करने का कोई मतलब नहीं है और इसीलिए हम विरोध कर रहे हैं। शुरू से ही हमारी एक ही मांग रही है कि हमें बोलने के लिए दो मिनट दिए जाएं। लोकतंत्र में लोकसभा और राज्यसभा मिलकर लोकतंत्र के दो स्तंभ हैं। आप एक स्तंभ को कमजोर या नष्ट नहीं कर सकते और फिर सिर्फ दूसरे पक्ष में बोलकर लोकतंत्र को कायम रखने का दावा नहीं कर सकते।"श्री खरगे ने कहा कि ऐसा लगता है कि मोदी सरकार ने ठान लिया है कि विपक्ष के दोनों नेताओं को बात करने नहीं देना है। न लोक सभा में और न राज्य सभा में, हमारे बड़े-बड़े नेता, जिन्होंने इस देश के लिए कुर्बानी दी, जिन्होंने इस देश के लिए लड़ाई लड़ी, जेलों में गए और अंग्रेज़ों के खिलाफ लड़कर देश को आज़ादी दिलाई, उन नेताओं के खिलाफ एक आदमी सदन में बोलता है। उसे माइक दिया जाता है, वह माइक पर मनमानी गालियाँ देता है और सरकार के वरिष्ठ लोग चुप्पी साध लेते हैं। इसकी निंदा करनी चाहिए थी लेकिन क्या भाजपा वालों ने कभी ऐसा किया।

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