नादौन (हमीरपुर) , दिसंबर 07 -- हिमाचल प्रदेश के कई किसानों ने प्राकृतिक खेती अपनाकर न केवल अपने लिए सुरक्षित और पौष्टिक फल, सब्जियां व अनाज उगा रहे हैं, बल्कि सस्ती और जहर-मुक्त खेती पद्धति से अच्छी आर्थिक कमाई भी कर रहे हैं।
नादौन उपमंडल के ग्राम पंचायत कमलाह के सद्भड़ गांव के श्री अमर सिंह ने भी यह परम्परागत खेती का तरीका अपनाया और आज वे स्थानीय बाजार में हर साल लगभग एक लाख रुपये की सब्जियां बेच रहे हैं।
श्री अमर सिंह कई वर्षों से अपनी पैतृक जमीन पर रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों का उपयोग करके खेती करते थे और साथ ही एक अस्थायी नौकरी भी करते थे। इससे खर्चा ज्यादा था और खेतों में रासायनिक उर्वरकों व कीटनाशकों का जहर फैल रहा था। यह जहर उत्पाद में भी जा रहा था तथा मिट्टी की उर्वरा शक्ति लगातार घट रही थी।
कुछ वर्ष पहले उन्हें पॉलीहाउस और प्राकृतिक खेती के बारे में पता चला तो उन्होंने इसे आजमाने का निर्णय लिया। पहले उन्होंने पॉलीहाउस और नर्सरी लगाई, जिसमें उन्हें भारी मुनाफा हुआ। इसके बाद कृषि विभाग के आंतरिक परियोजना के अधिकारियों के मार्गदर्शन में श्री अमर सिंह ने प्राकृतिक खेती की ओर कदम बढ़ाया।
राज्य सरकार की प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहन देने वाली योजना के तहत उन्हें दो दिन का विशेष प्रशिक्षण दिया गया तथा प्राकृतिक खेती के लिए जरूरी सामग्री और ड्रम आदि बनाने पर 80 प्रतिशत सब्सिडी दी गई। अब वे पूरी तरह प्राकृतिक खेती से ही विभिन्न फसलें, सब्जियाँ और फल के पेड़ लगा रहे हैं।
श्री अमर सिंह ने बताया कि वे घर पर ही गोबर, गोमूत्र, गुड़ और बेसन से जीवामृत तैयार करते हैं और खेतों में छिड़काव करते हैं। इससे उन्हें बहुत अच्छी पैदावार मिल रही है। वे आलू, प्याज, लहसुन, बैंगन, पत्तागोभी, अन्य सब्जियां, सरसों और अन्य फसलें पूरी तरह प्राकृतिक तरीके से उगा रहे हैं।
इन फसलों को स्थानीय बाजार में अच्छे दाम मिल रहे हैं। परिवार की जरूरत पूरी करने के बाद भी वे बाजार में सब्जियाँ बेचकर अच्छी कमाई कर रहे हैं। सालाना करीब एक लाख रुपये तक की सब्जियाँ बेच रहे हैं। इसके अलावा उन्होंने अमरूद, पपीता, कीवी और अन्य फल के पेड़ भी लगा रखे हैं।
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