हनुमानगढ़ , दिसम्बर 10 -- राजस्थान में हनुमानगढ़ जिले के टिब्बी थाना क्षेत्र में राठीखेड़ा गांव में निजी क्षेत्र के एशिया के सबसे बड़े इथेनॉल संयंत्र के विरोध में बुधवार देर शाम ग्रामीणों और पुलिस के बीच जबरदस्त हिंसक झड़प हुई।
उग्र भीड़ ने संयंत्र की दीवार तोड़कर अंदर घुसने की कोशिश की, जिसके जवाब में पुलिस ने लाठीचार्ज, रबर की गोलियां और आंसू गैस के गोले दागे। इस टकराव में कांग्रेस विधायक अभिमन्यु पूनिया समेत कई लोग घायल हो गए, जबकि कई वाहनों को आग के हवाले कर दिया गया। स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है और अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार देर शाम टिब्बी थाना क्षेत्र के चक 5-आरके में निर्माणाधीन इथेनॉल संयंत्र पर महापंचायत से निकली भीड़ ने हमला बोल दिया। ग्रामीणों ने संयंत्र की दीवार तोड़कर अंदर घुसने का प्रयास किया, जहां पुलिस और प्रशासन के वाहन खड़े थे। उग्र प्रदर्शनकारियों ने दीवार के अंदर और बाहर खड़े 10 से अधिक चौपहिया वाहनों को जला दिया और तोड़फोड़ की। एक जेसीबी मशीन को आग के हवाले कर दिया गया, जबकि दो अन्य जेसीबी को क्षतिग्रस्त कर दिया। इसके अलावा एक सरकारी गाड़ी और तीन-चार मोटरसाइकिलों को भी जला दिया गया।
इस पर पुलिस ने भीड़ को खदेड़ने के लिए जबरदस्त लाठीचार्ज किया, रबर की गोलियां चलाईं और आंसू गैस के गोले छोड़े। टकराव करीब आधे घंटे तक चला, जिसमें पत्थरबाजी और आगजनी की घटनाएं हुईं।
इस घटना में संगरिया से कांग्रेस विधायक अभिमन्यु पूनिया मामूली रूप से घायल हो गए और उन्हें हनुमानगढ़ टाउन सिविल अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर में इलाज के लिए ले जाया गया। कई पुलिसकर्मी और ग्रामीण भी लाठीचार्ज और पत्थरबाजी से घायल हुए, जिनमें महिलाएं भी शामिल हैं।
हिंसा की सूचना मिलते ही हनुमानगढ़ जिला मुख्यालय से जिला कलेक्टर डॉ. खुशाल यादव और पुलिस अधीक्षक हरिशंकर मौके पर पहुंचे। कानून एवं व्यवस्था बनाए रखने के लिए चूरू और बीकानेर जिलों से अतिरिक्त पुलिस बल बुलाया गया। देर शाम तक तनाव की स्थिति बनी हुई थी, हालांकि हिंसक झड़प रुक गई थी और पुलिस तथा ग्रामीण आमने-सामने डटे हुए थे।
उल्लेखनीय है कि टिब्बी उपखंड मुख्यालय से तलवाड़ा मार्ग पर करीब तीन किलोमीटर दूर ग्राम पंचायत राठी खेड़ा के चक 5-आरके में एक निजी कंपनी द्वारा राज्य सरकार से किये गये करार के तहत इथेनॉल संयंत्र लगाया जा रहा है। करीब 450 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला यह संयंत्र एशिया का सबसे बड़ा संयंत्र बताया जा रहा है। संयंत्र की गतिविधियां शुरू होने के साथ ही राठीखेड़ा और आसपास के गांवों के लोगों ने विरोध शुरू कर दिया। ग्रामीणों ने 'इथेनॉल फैक्ट्री हटाओ, क्षेत्र बचाओ संघर्ष समिति' का गठन किया और आंदोलन छेड़ दिया। करीब डेढ़ वर्ष से संयंत्र के मुख्य द्वार के सामने निरंतर धरना चल रहा था, जिसकी वजह से निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पा रहा था। निजी कंपनी को काफी नुकसान हो रहा था। बताया जाता है कि कंपनी ने केंद्र और राज्य स्तर पर प्रयास किए, जिसके फलस्वरूप 18 नवंबर को तड़के करीब पांच बजे सैकड़ों पुलिसकर्मियों ने धरने पर बैठे ग्रामीणों को खदेड़ दिया और उनका शामियाना उखाड़ फेंका। उसी दिन क्षेत्र में शांति व्यवस्था के लिए भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 लगा दी गई। धरना हटाने के बाद संयंत्र का निर्माण शुरू हो गया, जिसमें पहले चरण में चारदीवारी बनाई गई, लेकिन आंदोलनकारी सक्रिय रहे और बार-बार निर्माण रोकने की मांग जिला प्रशासन से की, लेकिन सुनवाई नहीं हुई।
आज टिब्बी में उपखंड अधिकारी कार्यालय के सामने के मैदान में महापंचायत आयोजित की गई। सुबह से ही बड़ी संख्या में क्षेत्रवासी, आसपास के गांवों के लोग, साथ ही पंजाब और हरियाणा से ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में सवार होकर लोग पहुंचे। भीड़ इतनी बड़ी थी कि मैदान छोटा पड़ गया। गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटी ने विशाल लंगर की व्यवस्था की, जो भीड़ के आकार का संकेत देती रही।
महापंचायत में फैक्ट्री हटाओ संघर्ष समिति के पदाधिकारियों के साथ क्षेत्र के प्रमुख नेता पहुंचे। संगरिया विधायक अभिमन्यु पूनिया, पूर्व विधायक बलवान पूनिया, कांग्रेस नेत्री शबनम गोदारा, किसान नेता मंगेज चौधरी, रवि जोसन और माकपा नेता रघुवीर वर्मा ने भीड़ को संबोधित किया। सभी ने एक सुर में कहा कि यह लड़ाई पूरे क्षेत्र की है न कि किसी एक समूह की।
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