भरतपुर , अक्टूबर 17 -- रूस के साइबेरिया से उड़ान भरने के बाद कई हजार किलोमीटर का सफर तय करके हिंदुस्तान की सरजमीं पर राजस्थान में पक्षियों का स्वर्ग कहे जाने वाले भरतपुर के केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान में कुरजां पक्षी (डोमिसाइल क्रेन) के अपने शीतकालीन प्रवास पर पहुंचते ही पक्षी प्रेमियों में खुशी की लहर दौड़ गई।
कुरजां साईबेरिया से हर वर्ष अगस्त-सितंबर के प्रथम सप्ताह में उड़ान भरकर सामान्यतः 30 दिन में हिंदुस्तान की सीमा में दीपावली से पहले प्रवेश करके केवला देव पहुंच जाते हैं। कुरजां पक्षियों के झुंड मार्च तक केवला देव में प्रवास करके हजारों देशी विदेशी पर्यटकों का मन मोहते रहे हैं।
पक्षी विशेषज्ञों के अनुसार रूस के बुर्यातिया और तुवा क्षेत्रों में टैग किए कुरंजा पक्षियों के कई मुख्य झुंड अभी रास्ते में हैं। जैसे ही मानसूनी बादल हटेंगे वे एक सप्ताह के भीतर हिन्दुतान की सीमा में प्रवेश कर जाएंगे। इसके अलावा मानसून की बारिश के चलते रास्ते में अस्थायी जलाशय एवं नमीयुक्त चारागाह पर भोजन और विश्राम की सुविधा मिलने से कुरजां के झुंड बीच में रुक रहे हैं।
पक्षी विशेषज्ञों ने बताया कि केवलादेव में प्रजनन के बाद ये पक्षी अपने बच्चों को उड़ने लायक होने पर हिंदुस्तान की सरजमीं को अलविदा कहकर यहां से निकल जाते हैं। सफर के दौरान पांच से आठ किलोमीटर की ऊंचाई पर उड़ान भरने वाले कुरजां पर हिंदुस्तान में कई लोकगीत काफी मशहूर हैं, जिनमे 'कुरजां ए म्हारो भंवर मिला दे' बेहद लोकप्रिय है. जिसमें पत्नी-पति वियोग में इन पक्षियों से पति को मिलाने का आग्रह करती है।
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