हजारीबाग , जनवरी 02 -- झारखंड के हजारीबाग केंद्रीय कारा से बंदियों के फरार होने के मामले में जेल प्रशासन की बड़ी लापरवाही सामने आई है।

जांच में खुलासा हुआ है कि जेल की चारदीवारी और सुरक्षा घेरे में लगे तारों में करंट प्रवाहित नहीं हो रहा था, जिसका सीधा फायदा फरार कैदियों को मिला। फरारी की पूरी योजना अंधेरे, घने कोहरे और रात के समय बिजली आपूर्ति बंद रहने की स्थिति को ध्यान में रखकर बनाई गई थी।

इस मामले में एसपी द्वारा गठित एसआईटी ने जांच और छापेमारी तेज कर दी है। पांच अलग-अलग टीमें धनबाद, रांची और बिहार के विभिन्न इलाकों में संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही हैं। पुलिस सूत्रों के अनुसार जल्द ही बड़ी सफलता मिलने की उम्मीद है।

जांच के दौरान यह भी सामने आया है कि जेल सुरक्षा में तैनात जैप के 28 जवानों पर कार्रवाई की तलवार लटक रही है। लापरवाही के आरोप में किसी भी समय इन पर गाज गिर सकती है।

प्रारंभिक विभागीय जांच के बाद जेल प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए दो स्थायी हेड वार्डन को गुरुवार देर शाम निलंबित कर दिया। निलंबित किए गए कर्मियों में हरेंद्र महतो और उमेश सिंह शामिल हैं। जानकारी के अनुसार सेक्टर संख्या-6 के वार्ड नंबर-4 में तीनों सजायाफ्ता बंदी बंद थे। इसी वार्ड से लोहे की रॉड काटकर वे फरार हुए, और उस समय इन्हीं दोनों हेड वार्डनों की ड्यूटी वहां लगी थी।

पुलिस कुख्यात अपराधी देवा भुईयां के पुराने आपराधिक इतिहास को खंगाल रही है। देवा भुईयां हजारीबाग की गलियों और इलाकों से भली-भांति परिचित रहा है। वर्ष 2021 में वह धनबाद जेल से शौचालय की खिड़की तोड़कर रस्सी के सहारे फरार हुआ था और करीब साढ़े तीन वर्षों तक भूमिगत रहा। इस दौरान वह हजारीबाग में भी लंबे समय तक छिपा रहा। उसके खिलाफ धनबाद जिले के विभिन्न थानों में एक दर्जन से अधिक गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं। जांच में संकेत मिले हैं कि हजारीबाग जेल से फरारी के दौरान भी उसी पुराने तरीके को दोहराया गया।

जेल सूत्रों के मुताबिक कैदियों और जेल प्रशासन के बीच संभावित गठजोड़ की भी जांच की जा रही है। पूर्व में भी ऐसे मामलों में विभाग को भारी नुकसान उठाना पड़ा है। पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि फरारी में तीसरा व्यक्ति कौन था, जिसने अंदर या बाहर से कैदियों की मदद की।

घटना के दूसरे दिन जैप-7 के डीएसपी राजेंद्र कुमार जेल पहुंचे और सुरक्षा व्यवस्था की गहन समीक्षा की। उन्होंने ड्यूटी पर तैनात जवानों की पोस्टिंग और ड्यूटी चार्ट की रिपोर्ट तलब की। बताया गया कि एक पोस्ट पर चार जवान तैनात रहते हैं और प्रत्येक जवान की ड्यूटी दो घंटे की होती है। रात में कोहरा और बिजली आपूर्ति बाधित रहने की स्थिति को फरारी से जोड़कर देखा जा रहा है। फिलहाल एसआईटी फरार बंदियों के नेटवर्क, मददगारों और सुरक्षा चूक की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है। जांच पूरी होने के बाद जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मियों पर कड़ी कार्रवाई तय मानी जा रही है।

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