रांची , जनवरी 10 -- झारखंड हाईकोर्ट ने हजारीबाग के तत्कालीन डिप्टी कमिश्नर एवं निलंबित आईएएस अधिकारी विनय कुमार चौबे को बड़ा झटका देते हुए उनकी नियमित जमानत याचिका खारिज कर दी है।
जस्टिस संजय कुमार द्विवेदी की अदालत ने मामले की गंभीरता और आरोपी के प्रभावशाली पद को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय सुनाया।
अदालत ने कहा कि एक आईएएस अधिकारी जिले में सरकार का प्रतिनिधि और सरकारी रिकॉर्ड का संरक्षक होता है। रिकॉर्ड पर उपलब्ध साक्ष्य यह दर्शाते हैं कि याचिकाकर्ता बिचौलियों के माध्यम से अवैध भूमि लेन-देन में गहराई से संलिप्त थे और अपने पद का दुरुपयोग कर कुछ लोगों को अनुचित लाभ पहुंचाया गया।
विनय कुमार चौबे के खिलाफ एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) ने हजारीबाग में पदस्थापना के दौरान सरकारी एवं प्रतिबंधित जमीनों के अवैध हस्तांतरण को लेकर मामला दर्ज किया है। कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि हाल के वर्षों में सामाजिक-आर्थिक अपराधों में वृद्धि हुई है, जो देश की आर्थिक संरचना को नुकसान पहुंचाने के साथ-साथ व्यवस्था में जनता के विश्वास को भी कमजोर करते हैं।
हाईकोर्ट ने यह भी माना कि विनय चौबे एक अत्यंत प्रभावशाली पद पर रह चुके हैं। ऐसे में जमानत मिलने पर उनके द्वारा गवाहों को प्रभावित करने और दस्तावेजी साक्ष्यों से छेड़छाड़ की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
सुनवाई के दौरान एसीबी के अधिवक्ता ने दलील दी कि आरोपी जांच में सहयोग नहीं कर रहे हैं और कई अहम बिंदुओं पर जांच अभी लंबित है। कोर्ट के समक्ष ऐसे गवाहों के बयान भी प्रस्तुत किए गए, जिन्होंने बताया कि बिचौलियों के माध्यम से उन्हें तत्कालीन डीसी से आश्वासन मिला था।
वहीं विनय चौबे की ओर से उपस्थित अधिवक्ता ने दावा किया कि उन्हें झूठा फंसाया गया है और एफआईआर में उनका नाम प्रारंभ में दर्ज नहीं था। हालांकि अदालत ने इन दलीलों को स्वीकार नहीं करते हुए अपराध की गंभीरता को देखते हुए जमानत देने से इनकार कर दिया।
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