चंडीगढ़ , जनवरी 10 -- रियाणा के राज्यपाल प्रो. असीम कुमार घोष ने सभी की भलाई सुनिश्चित करने के लिए महान संत स्वामी विवेकानंद की शिक्षाओं का पालन करने का आह्वान किया है। वे शनिवार को चंडीगढ़ स्थित रामकृष्ण मिशन आश्रम में स्वामी विवेकानंद की जयंती के अवसर पर आयोजित समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रहे थे।

इस अवसर पर लेडी गवर्नर श्रीमती मित्रा घोष, रामकृष्ण मिशन आश्रम, चंडीगढ़ के सचिव स्वामी भीतिहरानंद जी महाराज तथा आश्रम के अन्य पदाधिकारी भी उपस्थित रहे। समारोह को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने स्वामी रामकृष्ण परमहंस और स्वामी विवेकानंद के योगदान को याद करते हुए कहा कि इन महान आत्माओं ने धर्म को समाज के समग्र आध्यात्मिक सशक्तिकरण का माध्यम बनाया। उन्होंने कहा कि दोनों संतों की शिक्षाएं मानवता के कल्याण और मनुष्य के भीतर निहित श्रेष्ठ गुणों को जागृत करने पर केंद्रित थीं।

प्रो. घोष ने कहा कि स्वामी रामकृष्ण परमहंस और स्वामी विवेकानंद के लिए धर्म मानवता की सेवा का साधन था, जिससे लोग हिंदू धर्म के उच्च मानकों और मानवीय मूल्यों के अनुरूप एक सार्थक जीवन जी सकें। शिकागो में दिए गए स्वामी विवेकानंद के ऐतिहासिक भाषण का उल्लेख करते हुए राज्यपाल ने कहा कि उन्होंने भारतीय संस्कृति और सभ्यता की महानता को विश्व मंच पर प्रस्तुत किया और धर्म को निस्वार्थ सेवा से जोड़ने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि स्वामी विवेकानंद का विश्वास था कि ईश्वर प्रत्येक जीव में विद्यमान है, विशेष रूप से गरीबों, कमजोरों और पीड़ितों में। इसी विचारधारा ने उन्हें मानव सेवा को ईश्वर सेवा के रूप में देखने की प्रेरणा दी। उन्होंने सार्वभौमिक भाईचारे, सामाजिक समानता और दूसरों के उत्थान को ही सच्चा धर्म बताया।

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