नयी दिल्ली , जनवरी 23 -- प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार को महान आध्यात्मिक गुरु और स्वामिनारायण संप्रदाय के संस्थापक द्वारा रचित ग्रंथ'शिक्षापत्री' के द्विशताब्दी महोत्सव को संबोधित करते हुए प्रबुद्ध संगठनों से देश के प्राचीन ज्ञान को बचाने और पांडुलिपियों को संरक्षित करने में सरकार का सहयोग करने का आह्वान किया।

श्री मोदी ने समारोह को वीडियो काफ्रेंसिंग के माध्यम से संबोधित करते हुए प्राचीन पांडुलिपियों के संरक्षण के लिए अपनी सरकार द्वारा चलाये जा रहे 'ज्ञान भारतम् मिशन' में स्वामिनारायण संस्था जैसे संगठनों से सहयोग की अपील की। श्री मोदी ने कहा, " आप सभी जानते हैं, देश ने प्राचीन पांडुलिपियों के संरक्षण के लिए ज्ञान भारतम् मिशन शुरू किया है। मेरा यह आग्रह है कि आप जैसे सभी प्रबुद्ध संगठन इस काम में और ज्यादा सहयोग करें। हमें, हमारे भारत के प्राचीन ज्ञान को बचाना है, हमें उसकी पहचान को बचाना है। "प्रधानमंत्री ने कहा कि भगवान स्वामिनारायण का जीवन, साधना के साथ-साथ सेवा की भी प्रतिमूर्ति था। आज उनके अनुयायियों द्वारा समाज, राष्ट्र और मानवता की सेवा के कितने ही अभियान चल रहे हैं। शिक्षा और स्वास्थ्य से जुड़े प्रकल्प, किसान कल्याण के संकल्प, जल से जुड़े अभियान, ये वास्तव में सराहनीय हैं।

शिक्षापत्री स्वामिनारायण (संन्यासी सहजानंद स्वामी) द्वारा 1826 में संस्कृत में लिखी गयी पुस्तक है, जिसमें शिक्षाप्रद 212 श्लोक हैं।

प्रधानमंत्री स्वामिनारायण के जयकारे के साथ शुरू किये गये अपने संबोधन में कहा कि भारत, ज्ञान-योग के लिए समर्पित रहा है। हजारों साल पुराने वेद, हमारे लिए आज भी प्रेरणा हैं। हमारे ऋषि-मुनियों ने अपने समय के अनुरूप, वेदों के प्रकाश में उस समय की व्यवस्थाओं को निरंतर विकसित किया। उन्होंने कहा कि वेदों से उपनिषद, उपनिषदों से पुराण, श्रुति, स्मृति, कथावाचन, गायन, ऐसे विविध आयामों से हमारी परंपरा सामर्थ्यवान होती रही।

प्रधानमंत्री ने कहा कि भगवान स्वामिनारायण के जीवन के प्रसंग, लोक शिक्षा, लोक सेवा से जुड़े रहे हैं। इसी अनुभव को उन्होंने सरल शब्दों में समझाया। शिक्षापत्री के रूप में भगवान स्वामिनारायण ने हमें जीवन का अनमोल मार्गदर्शन दिया।

श्री मोदी ने कहा, " आज द्विशताब्दी समारोह का ये विशेष अवसर हमें यह आकलन करने का मौका देता है कि हम शिक्षापत्री से क्या-कुछ नया सीख रहे हैं, उसके आदर्शों को कितना अपने जीवन में जी रहे हैं? "प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर लोगों से स्वदेशी और स्वच्छता जैसे जन-आंदोलनों, वोकल फॉर लोकल (स्थानीय समान की खरीद और प्रचार) जैसे अभियानों से जुड़ने का आह्वान किया। उन्होंने इस समय मनाये जा रहे सोमनाथ स्वाभिमान पर्व से जुड़ने और महोत्सव के उद्देश्यों को जन-जन तक ले जाने की अपील भी की।

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