मोहाली , नवंबर 19 -- विश्व सीओपीडी (क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिज़ीज़) दिवस के अवसर पर बुधवार को शैल्बी हॉस्पिटल मोहाली के पल्मोनोलॉजी के निदेशक डाॅ सुरेश गोयल ने फेफड़ों से जुड़ी बढ़ती बीमारियों पर गहरी चिंता व्यक्त की और समय पर जीवनशैली में सुधार को फेफड़ों को सुरक्षित रखने की सबसे प्रभावी उपाय बताया।

डाॅ गोयल ने कहा कि सीओपीडी रोकी जा सकने वाली और इलाज योग्य बीमारी होने के बावजूद विश्व स्तर पर एक बड़ी स्वास्थ्य चुनौती बनी हुई है। हर साल दुनिया-भर में लगभग 35 लाख मौतें इस बीमारी से होती हैं, जबकि भारत में करीब 8.5 लाख लोग सीओपीडी के कारण जान गंवाते हैं। उन्होंने कहा कि सिगरेट पीना इसका सबसे बड़ा जोखिम कारक है। एक सिगरेट जीवन के लगभग 11 मिनट कम कर देती है और फेफड़ों, भोजन नली, मुंह, गुर्दे और यूरिनरी ब्लैडर सहित कई तरह के कैंसर का खतरा बढ़ा देती है। उन्होंने बताया कि इस साल का थीम "सांस फूल रही है? तो सोचिए सीओपीडी" यह जन-जागरूकता की भारी कमी की ओर संकेत करती है। कई मरीज तब अस्पताल पहुंचते हैं जब फेफड़ों का काफी नुकसान हो चुका होता है। लंबे समय तक खांसी या सांस फूलने जैसे लक्षण आने से पहले ही फेफड़ों की कार्यक्षमता घटनी शुरू हो जाती है, इसलिए समय पर जांच बेहद जरूरी है।

डॉ गोयल ने देश में बिगड़ती हवा की गुणवत्ता पर भी चिंता जताई और कहा कि बढ़ता प्रदूषण निमोनिया से लेकर दमे की बढ़ती गंभीरता तक, अनेक श्वसन रोगों में इजाफा कर रहा है। लोगों को सतर्क करते हुए डाॅ गोयल ने धूम्रपान छोड़ने, नियमित व्यायाम करने, श्वास तकनीकों को अपनाने और समय-समय पर फेफड़ों की जांच कराने की सलाह दी। ये कदम फेफड़ों की क्षमता बढ़ाने और जीवन की गुणवत्ता सुधारने में मददगार होते हैं। बेहतर फेफड़ा स्वास्थ्य के लिए उन्होंने आंवला, खट्टे फल, पालक, गाजर, हल्दी और ग्रीन टी को आहार में शामिल करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि अखरोट, अलसी के बीज और फिश ऑयल भी श्वसन स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभकारी हैं।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित