पंतनगर , अप्रैल 07 -- गोविन्द बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के 37वें दीक्षांत समारोह में उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (अप्रा) ने छात्र छात्राओं से राष्ट्र निर्माण में योगदान देने का आह्वान किया।

महामहिम ने अपने संबोधन में कहा कि दीक्षांत समारोह केवल डिग्री वितरण का अवसर नहीं बल्कि राष्ट्र के कृषि इतिहास, उपलब्धियों और उज्ज्वल भविष्य का उत्सव है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों के जीवन का यह एक निर्णायक मोड़ है, जहां से उनके निर्णय और प्रयास न केवल उनके व्यक्तिगत जीवन बल्कि समाज और राष्ट्र की दिशा भी तय करेंगे।

उन्होंने भारतीय परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि "अन्न को ब्रह्म" माना गया है और अधिकाधिक अन्न उत्पादन हमारा सर्वोच्च व्रत होना चाहिए। उन्होंने कृषि को केवल आर्थिक गतिविधि नहीं, बल्कि मानव सभ्यता और अस्तित्व का आधार बताया।

राज्यपाल ने कहा कि स्वतंत्रता के समय देश खाद्यान्न संकट से जूझ रहा था और शिप टूम माउथ इकानॉमिक की स्थिति थी, लेकिन पंतनगर विश्वविद्यालय की स्थापना ने कृषि क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव की नींव रखी। हरित क्रांति में इस विश्वविद्यालय की भूमिका को उल्लेखनीय बताते हुए उन्होंने कहा कि यहां विकसित उन्नत बीज, आधुनिक तकनीकों और वैज्ञानिक दृष्टिकोण ने भारत को खाद्यान्न के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाया।

उन्होंने "सीड टू प्लेट" अवधारणा का जिक्र करते हुए कहा कि पंतनगर विश्वविद्यालय ने गुणवत्तापूर्ण बीज उत्पादन और उनके प्रसार में अग्रणी भूमिका निभाई है। यहां से शिक्षित छात्र देशभर में कृषि अनुसंधान और शिक्षा को मजबूत कर रहे हैं।

आधुनिक कृषि पर जोर देते हुए राज्यपाल ने कहा कि आज का दौर तकनीक और नवाचार का है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ड्रोन, प्रिसिजन फार्मिंग और बायोटेक्नोलॉजी जैसे साधनों को अपनाकर "स्मार्ट एग्रीकल्चर" की दिशा में आगे बढ़ना होगा, जिससे कृषि अधिक लाभकारी और टिकाऊ बनेगी।

उन्होंने उत्तराखंड में कृषि की संभावनाओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि पर्वतीय कृषि, जैविक खेती, मिलेट्स, बागवानी और औषधीय पौधों के क्षेत्र में राज्य मॉडल बन सकता है। सेब, कीवी, ड्रैगन फ्रूट, सब्जियां और पुष्प उत्पादन किसानों की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

राज्यपाल ने विद्यार्थियों से बड़े सपने देखने और 'जॉब सीकर' के बजाय 'जॉब प्रोवाइडर' बनने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि एग्री-बिजनेस, स्टार्टअप और फूड प्रोसेसिंग के माध्यम से युवा न केवल आत्मनिर्भर बन सकते हैं, बल्कि रोजगार के नए अवसर भी सृजित कर सकते हैं।

कार्यक्रम में कृषि मंत्री गणेश जोशी ने पंतनगर विश्वविद्यालय को हरित क्रांति की जन्मस्थली बताते हुए विद्यार्थियों को देश की कृषि का भविष्य बताया। वहीं सांसद अजय भट्ट ने विश्वविद्यालय के योगदान को ऐतिहासिक बताते हुए युवाओं से नवाचार और ग्रामीण विकास में भागीदारी का आह्वान किया।

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