मोतिहारी , जनवरी 09 -- बिहार में पूर्वी चंपारण के कैथवलिया में विश्व के सबसे बड़े शिवलिंग "सहस्त्र शिवलिंगम" की वैदिक अनुष्ठान के साथ हेलीकॉप्टर से पुष्प वर्षा और "सप्तनदियों" (गंगा, यमुना, सरस्वती (पौराणिक), सिंधु, नर्मदा, गोदावरी और कावेरी ) के जल से अभिषेक के साथ कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि, 17 जनवरी को शिवरात्रि के दिन स्थापना की जाएगी।

विराट रामायण मंदिर न्यास समिति" के सदस्य सायन कुणाल ने इस संबंध में " संवाद एजेंसी "यूनीवार्ता" को बताया कि देश की पवित्र "सप्तन्दियों" से जल मंगाये गये हैं। उन्होंने कहा कि 17 जनवरी को सुबह 8 बजे से 10 बजे तक "सहस्त्र शिवलिंगम" का पूजन यज्ञ होगा।इसी तिथि को प्रथम शिवलिंग अनन्त रूप में प्रकट हुए थे। आत्मा को परम चेतना से जोड़ने के इन दिव्य पलों को स्मरणीय बनाने की व्यवस्था "विराट रामायण मंदिर न्यास समिति" ने की है और इस दौरान देश के विद्वान धर्माचार्यो और संत-सन्यासियों को "सहस्त्र शिवलिंगम" कि स्थापना के यज्ञ में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया गया है।

श्री कुणाल ने बताया कि निर्धरित तिथि को 10 बजे से 12 बजे तक वैदिक मंत्रोच्चार के साथ हवन यज्ञ के मध्य "सहस्त्र शिवलिंगम" की स्थापना की जायेगी। उन्होंने कहा कि 210 टन वजनी और 33 फ़ीट लम्बाई वाले इस शिवलिंग को आधार स्तम्भ पर अधिष्ठापित करने के लिए 750 टन की क्षमता वाले दो क्रेन भोपाल से मंगाए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि स्थापना के बाद "सहस्त्र शिवलिंगम" का "सप्तन्दियों" के जल से हेलीकॉप्टर द्वारा जलाभिषेक किया जाएगा और फिर हेलीकॉप्टर से ही पुष्प वर्षा कर स्थापना यज्ञ को पूर्ण किया जाएगा।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को पहले शिवलिंग प्रकट हुए थे, जब ब्रह्मा और विष्णु के बीच श्रेष्ठता के विवाद के दौरान भगवान शिव एक अग्नि स्तंभ (ज्योतिर्मय लिंग) के रूप में सामने आये थे। इसी दिन से शिवलिंग की पूजा का विधान शुरू हुआ।

आचार्य शिवानन्द ब्रह्मचारी उर्फ वांचस्पति मिश्र ने बताया कि शिवरात्रि (माघ कृष्ण चतुर्दशी) पर शिवलिंग की स्थापना केवल एक धार्मिक क्रिया नहीं, बल्कि जीवन में शिव-चेतना को स्थायी रूप से प्रतिष्ठित करने का दिव्य अवसर है। यह दिन साधक, गृहस्थ और भक्त सभी के लिए समान रूप से कल्याणकारी है।

श्री ब्रह्मचारी का मानना है कि माघ कृष्ण चतुर्दशी की शिवरात्रि पर सहस्त्र शिवलिंगम की स्थापना एक अत्यंत दुर्लभ और महाशक्तिशाली अनुष्ठान है। यह केवल पूजा नहीं, बल्कि शिव-तत्व में पूर्ण समर्पण और आत्मोन्नति का दिव्य मार्ग है।

बिहार के सबसे पौराणिक सोमेश्वर नाथ मंदिर के महंत महामंडलेश्वर स्वामी रविशंकर गिरि ने बताया कि समुद्र मंथन से निकले विष का त्रयोदशी तिथि को देवाधिदेव महादेव ने सृष्टि की रक्षा करने के लिए पान किया था और वह "नीलकंठ" बन गए। विष के ताप से मुक्ति के लिए देवताओं ने कृष्ण चतुर्दशी तिथि को महादेव के लिंगस्वरूप का जलाभिषेक किया था। इस कारण इस तिथि का विशेष आध्यात्मिक महात्म्य है। पुराणों के अनुसार शिवरात्रि, मोक्षदायिनी रात्रि है। शिव की उपासना से भय, अज्ञान और मृत्यु का बंधन टूटता है तथा साधक आत्मिक शांति और मुक्ति की ओर बढ़ता है। शिवरात्रि आत्मजागरण, साधना और शिव-तत्त्व से एकाकार होने का अनुपम अवसर है। यह रात्रि हमें बाहरी आडंबर से हटकर भीतर की यात्रा करने, अहंकार त्यागने और कल्याण के मार्ग पर अग्रसर होने की प्रेरणा देती है। ऐसी पवन तिथि को "सहस्त्र शिवलिंगम" की स्थापना विशेष ऊर्जा का सृजन करेगा, जिससे जग के कल्याण का मार्ग प्रशस्त होगा।

"सहस्त्र शिवलिंगम" की स्थापना के अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं और विशिष्टजनों के आगमन की संभावना है। ऐसे में प्रशासनिक तैयारियां भी तेज हो गयी हैं।

पूर्वी चंपारण के जिलाधिकारी सौरभ जोरवाल और पुलिस अधीक्षक स्वर्ण प्रभात ने अपनी टीम के साथ "विराट रामायण मंदिर" कैथवलिया के परिसर का गुरुवार को गहन निरीक्षण किया और तैयारियों की समीक्षा की। यज्ञ की निर्विघ्न सफलता के लिए बड़ी संख्या में दण्डाधिकारियों के नियंत्रण में सशस्त्र बलों के तैनाती की तैयारी की जा रही है।

उल्लेखनीय है कि बिहार में पूर्वी चंपारण के कैथवलिया में महावीर मंदिर ट्रस्ट, पटना की तरफ से विश्व के सबसे बड़े "विराट रामायण मंदिर" का निर्माण कराया जा रहा है, जिसके प्रथम चरण में "सहस्त्र शिवलिंगम" की स्थापना 17 जनवरी 2026 को की जाएगी। इस विराट मंदिर का आकार भी बेहद भव्य होगा। यह मंदिर 1080 फीट लंबा, 580 फीट चौड़ा एवं 270 फीट ऊंचा बनाया जा रहा है। कुल 123 अकड़ में फैले मंदिर का परिसर में 22 मंदिर और 18 शिखरों का निर्माण होगा, जिसे 2030 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

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