नागपुर , दिसंबर 04 -- महाराष्ट्र विधानसभा का शीतकालीन सत्र गुरुवार को नागपुर में शुरू हुआ।
गौरतलब है कि नागपुर समझौते के प्रावधानों के तहत हर साल आयोजित होने वाले इस सत्र को पहले ही छोटा किया जा चुका है। मूल रूप से आठ से 19 दिसंबर तक चलने वाला यह सत्र कार्य मंत्रणा समिति के निर्णय के बाद अब 14 दिसंबर को समाप्त होगा।
यह सत्र ऐसे समय में आयोजित हो रहा है, जब महाराष्ट्र में आदर्श आचार संहिता लागू है, जिसके कारण यह चिंता बढ़ गयी है कि सरकार विदर्भ के लिए किसी भी बड़ी पहल की घोषणा करने में भी सक्षम नहीं हो पाएगी।
यह अनिश्चितता बॉम्बे उच्च न्यायालय की नागपुर पीठ के एक आदेश के बाद आई है, जिसमें निर्देश दिया कि सभी नगर परिषद और नगर पंचायत चुनावों की मतगणना 21 दिसंबर को की जाए। अधिकारियों के अनुसार, इसके परिणामस्वरूप राज्य चुनाव आयोग की आचार संहिता अब 21 दिसंबर तक लागू रहेगी। पहले आचार संहिता मतगणना के चार दिसंबर को मतगणना के साथ ही खत्म होने वाली थी।
नागपुर शीतकालीन सत्र पारंपरिक रूप से वह मंच है जहाँ विदर्भ की लगातार चिंताएँ जैसे सिंचाई की कमी, कृषि संकट, औद्योगिक विकास, मानव-वन्यजीव संघर्ष और बेरोजगारी पर लगातार ध्यान दिया जाता है।
इस वर्ष असामयिक बारिश ने पूरे क्षेत्र में फसलों को नष्ट कर दिया है। संतरे, चावल, सोयाबीन और कपास किसानों सहित किसान मुआवजे, बीमा भुगतान और संभवतः ऋण माफी का इंतजार कर रहे हैं। ऐसे में सत्र का आचार संहिता के साये में होना मुश्किलें लेकर आ गया है। घटनाओं के इस संयोग ने क्षेत्र के लोगों को चिंतित कर दिया है। हालांकि, सरकार पहले ही 32,000 करोड़ रूपये के राहत पैकेज की घोषणा कर चुकी है।
विपक्ष के नेताओं ने सत्र को छोटा करने के लिए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाली महायुति सरकार की आलोचना की है।
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