श्रीनगर , अक्टूबर 30 -- जम्मू-कश्मीर विधानसभा के शरदकालीन सत्र के पाँचवें दिन गुरुवार को अध्यक्ष द्वारा बाढ़ पीड़ितों के पुनर्वास के मुद्दे पर चर्चा के लिए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के स्थगन प्रस्ताव को अस्वीकार करने के बाद जमकर हंगामा हुआ।

सदन की कार्यवाही शुरू होते ही भाजपा विधायकों ने हाल ही में आई बाढ़ से हुए नुकसान पर चर्चा की माँग की। विधानसभा अध्यक्ष अब्दुल रहीम राठेर ने सदन को कहा कि उन्होंने स्थगन प्रस्ताव को पहले ही अस्वीकार कर दिया है, लेकिन इस मुद्दे पर चर्चा के लिए वैकल्पिक तरीके तलाशेंगे।

विधानसभा के इस फैसले से नाराज भाजपा विधायक नारेबाजी करते हुए पहली पंक्ति में आ गए। इसके बाद अध्यक्ष ने विपक्ष के नेता सुनील शर्मा को संक्षेप में अपनी बात रखने की अनुमति दी।इसके बाद श्री शर्मा ने चर्चा से इनकार किए जाने पर निराशा व्यक्त की। उन्होंने कहा, "यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि सदन भारी बारिश से आई बाढ़ के प्रभाव पर चर्चा नहीं कर रहा है। लोगों को उम्मीद है कि उनके मुद्दों का समाधान यहां किया जाएगा... हमारे सदस्य ने गंभीरता दिखाने के लिए स्थगन प्रस्ताव रखा था, लेकिन अध्यक्ष ने इसे अस्वीकार कर दिया, बाढ़ पीड़ितों की उम्मीदों को कूड़ेदान में फेंक दिया। अगर सरकार उनकी पीड़ा को नजरअंदाज करती रही, तो हम बहिर्गमन करेंगे।" इस दौरान उन्होंने सड़क एवं भवन विभाग में भ्रष्टाचार का आरोप लगाने वाली एक समाचार रिपोर्ट का भी उल्लेख किया, जिसे लेकर भाजपा और नेशनल कॉन्फ्रेंस विधायकों के बीच गरमागरम बहस हुई और दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया।

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