चेन्नई , फरवरी 18 -- तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एवं द्रविड़ मुन्नेत्र कषगम (द्रमुक) अध्यक्ष एम. के. स्टालिन ने राज्यों को ज़्यादा स्वायत्तता देने और संघीय ढांचे को बनाये रखने की अपनी पुरानी मांग को दोहराते हुए बुधवार को कहा कि उनकी सरकार ने राज्यों को ज़्यादा अधिकार देने वाले संवैधानिक संशोधन की मांग की है।

केंद्र और राज्यों के संबंधों को लेकर उच्चतम न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश कुरियन जोसेफ के नेतृत्ववाली उच्च स्तरीय समिति की रिपोर्ट का विधानसभा में पहला भाग पेश करते हुए श्री स्टालिन ने राज्यों को स्वायत्तता देने और केंद्र में संघीय नियम के द्रमुक के रूख का ज़ोरदार समर्थन किया।

गौरतलब है कि तमिलनाडु सरकार ने 15 अप्रैल 2025 को इस समिति का गठन किया था इसमें भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के पूर्व अधिकारी एवं इंडियन मैरीटाइम यूनिवर्सिटी के पूर्व कुलपति के. अशोक वर्धन शेट्टी, और तमिलनाडु योजना आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष डॉ. एम. नागनाथन सदस्य के तौर पर शामिल थे।

रिपोर्ट पेश करने के बाद श्री स्टालिन ने कहा कि उन्होंने संसद में ज़रूरी बदलाव लाने के लिए बहुत ज़रूरी पहल की है ताकि यह पक्का हो सके कि राज्य सरकारों को सभी ज़रूरी अधिकार मिलें। उन्होंने कहा कि असल में संघवाद राज्यों के लिए कोई छूट नहीं बल्कि देश के लिए एक सुरक्षा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह एकता में कोई रुकावट नहीं बल्कि इसकी गारंटी है। यह सुविधा का कोई तरीका नहीं बल्कि संवैधानिक गरिमा का एक सिद्धांत है। उन्होंने कहा, कि यह शब्द और व्यवहार दोनों में असली होना चाहिए। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह रिपोर्ट जानकारी संबंधी वार्ता को बढ़ावा देगी और एक ज़्यादा संतुलित और सहयोगात्मक संघीय व्यवस्था में मदद करेगी।

उन्होंने कहा, "मुझे उम्मीद है कि रिपोर्ट का प्रथम भाग विधायकों, न्यायविदों, प्रशासकों, विद्वानों और नागरिकों को एक जैसा जोड़ेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के पास जो सीमित शक्ति हैं, उनके आधार पर राज्य सामाजिक न्याय, शिक्षा, स्वास्थ्य, अर्थव्यवस्था और अवसंरचना में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा, "हमें वित्तीय अधिकार और दूसरी मांगों को पूरा करने के लिए कड़ी लड़ाई लड़नी है ताकि यह पक्का हो सके कि राज्य सरकारों को सभी शक्ति मिलें, इसलिए आज हम संविधान में बदलाव लाने के लिए यह पहला कानूनी कदम उठा रहे हैं।

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