जयपुर , जनवरी 20 -- राजस्थान उच्च न्यायालय ने बूंदी जिले के भैंसखेड़ा स्थित राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय की छत गिरने की घटना पर स्वतः संज्ञान लेते हुए मंगलवार को शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को अगली सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का आदेश दिया।
14 जनवरी को हुई इस घटना में सौभाग्य से कोई जानमाल का नुकसान नहीं हुआ, क्योंकि घटना से कुछ मिनट पहले ही करीब 30 छात्र कक्षा से निकलकर खुले मैदान में बैठ गए थे। राज्य में जर्जर स्कूल भवनों को लेकर कड़ा रुख अपनाते हुए न्यायाधीश महेन्द्र गोयल और अशोक जैन की खंडपीठ ने संबंधित अधिकारियों से विस्तृत स्पष्टीकरण मांगा है।
खंडपीठ ने कहा कि राज्य सरकार बार-बार यह आश्वासन देती रही है कि छात्रों को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराया जा रहा है, लेकिन जमीन पर स्थिति इसके विपरीत दिखाई देती है। जुलाई 2025 में झालावाड़ जिले में स्कूल भवन गिरने से सात छात्रों की मौत हो चुकी है। इसके बावजूद 22 अगस्त 2025 को उच्च न्यायालय द्वारा जर्जर स्कूल भवनों के इस्तेमाल पर लगाई गई रोक का पालन नहीं किया जा रहा है।
खंडपीठ यह भी टिप्पणी की कि उसके आदेशानुसार मांगा गया शपथ पत्र अब तक दाखिल नहीं किया गया है, जबकि इसके लिए समय बढ़ाने का आवेदन भी पहले ही दिया जा चुका था।
उच्च न्यायालय ने प्राथमिक एवं माध्यमिक शिक्षा निदेशकों को अगली सुनवाई, दो फरवरी 2026 को अदालत में उपस्थित रहने के निर्देश दिए हैं।
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