धर्मशाला , जनवरी 11 -- हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा सिंचाई सुविधाओं के निरंतर विस्तार से राज्य में कृषि परिदृश्य में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है, जिससे किसानों की आजीविका उल्लेखनीय रूप से सुदृढ़ हुई है। कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और वर्षा पर निर्भरता के कारण काफी लंबे समय से कृषि क्षेत्र को सिंचाई संबंधी गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा था।
वर्षा आधारित खेती पर निर्भरता कम करने के उद्देश्य से सरकार जल संरक्षण टैंक, लिफ्ट सिंचाई, पारंपरिक कूहल, स्प्रिंकलर तथा ड्रिप सिंचाई प्रणालियों को बढ़ावा दे रही है। इनके साथ ही सौर ऊर्जा आधारित सिंचाई योजनाएं विशेष रूप से दूरदराज और ऊंचाई वाले क्षेत्रों के लिए परिवर्तिनकारी साबित हुई हैं। इन पहलों से सिंचित क्षेत्र का विस्तार हुआ है और किसानों की आय में वृद्धि दर्ज की गई है।
कृषि उपनिदेशक कुलदीप धीमान ने कहा कि सिंचाई केवल एक सुविधा नहीं, बल्कि कृषि विकास की रीढ़ है। उन्होंने बताया कि समय पर और पर्याप्त सिंचाई फसल की गुणवत्ता, उत्पादकता और किसानों की आय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, विशेषकर सब्जी उत्पादन में, जो जल उपलब्धता के प्रति अत्यंत संवेदनशील होता है। श्री धीमान ने कहा कि जहां गेहूं जैसी पारंपरिक फसलों को तुलनात्मक रूप से कम सिंचाई की आवश्यकता होती है, वहीं सब्जी फसलों के लिए नियमित और समयबद्ध सिंचाई अनिवार्य है। सिंचाई में चूक होने पर पूरी फसल नष्ट होने की आशंका रहती है। इसी कारण सब्जी खेती में सिंचाई सुविधाओं को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाती है।
सौर सिंचाई योजना को किसानों के लिए "जीवनरेखा" बताते हुए उपनिदेशक ने कहा कि पिछले तीन वर्षों में कृषि विभाग ने इस योजना को प्रभावी ढंग से लागू कर सिंचाई से जुड़ी समस्याओं का समाधान किया है। योजना के तहत सौर ऊर्जा से चलने वाली जल-उठान पंप प्रणालियों की स्थापना पर अनुदान दिया जा रहा है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य किसानों को बिजली और डीजल पर निर्भरता से मुक्त करना, सिंचाई लागत कम करना और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देना है। सौर पंप लागत प्रभावी हैं और लंबे समय तक निर्बाध सिंचाई सुनिश्चित करते हैं।
उन्होंने बताया कि योजना के अंतर्गत जल भंडारण टैंकों के निर्माण, टैंकों की लाइनिंग तथा जल परिवहन के लिए पाइपलाइन बिछाने में भी सहायता प्रदान की जाती है। इससे दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों में भी सिंचाई संभव हो पाई है। जिन क्षेत्रों में पहले जल अभाव के कारण सिंचाई नहीं हो पाती थी, वहां अब सफलतापूर्वक सब्जी खेती की जा रही है, जिससे भूमि उत्पादकता बढ़ी है और कृषि विस्तार को बल मिला है। कई क्षेत्रों में दो से चार किसानों ने सामूहिक रूप से सौर सिंचाई योजना को अपनाकर बड़े भू-भाग में सिंचाई सुविधाएं विकसित की हैं। इससे बिना बिजली या डीजल पर अतिरिक्त खर्च किए नियमित सिंचाई संभव हुई है, उत्पादन लागत घटी है और मुनाफा बढ़ा है।
श्री धीमान ने कहा कि सब्जी फसलें किसानों को निरंतर और स्थायी आय प्रदान करती हैं। सौर सिंचाई योजना के माध्यम से किसान अनियमित मौसम और बिजली कटौती जैसी अनिश्चितताओं से काफी हद तक मुक्त हुए हैं। यह योजना विशेष रूप से छोटे और सीमांत किसानों के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध हुई है, जिससे वे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सके हैं।
कांगड़ा जिले की नंदेड पंचायत के बल्लाह सहोड़ा गांव के प्रगतिशील किसान रामकृष्ण सैनी, श्री सुनील कुमार, श्री करतार चंद और श्री प्रेम सिंह ने बताया कि उन्हें सिंचाई और संरक्षित खेती से जुड़ी विभिन्न कृषि योजनाओं का उल्लेखनीय लाभ मिला है। उन्होंने कहा कि फ्लो सिंचाई योजना के तहत उनके खेतों में 2.20 लाख रुपये की लागत से उथला बोरवेल बनाया गया, जिसमें 1.10 लाख रुपये की सब्सिडी दी गई। इससे वर्षभर सिंचाई संभव हुई और फसल उत्पादकता में उल्लेखनीय सुधार आया। सौर सिंचाई योजना के तहत पांच एचपी मोटर को कुल 4.23 लाख रुपये की लागत से लगाया गया जिसमें 3.81 लाख रुपये की सब्सिडी प्रदान की गई। इससे कम समय में बड़े क्षेत्र की सिंचाई संभव हुई, श्रम और परिचालन लागत में कमी आई।
'कृषि सशक्तिकरण हेतु जल' योजना के अंतर्गत 1.25 लाख लीटर क्षमता का जल भंडारण टैंक 4.92 लाख रुपये की लागत से निर्मित किया गया, जिसमें 100 प्रतिशत सब्सिडी दी गई। इससे वर्षा जल संरक्षण और शुष्क अवधि में सिंचाई में सहायता मिली। इसके अतिरिक्त, सूक्ष्म सिंचाई योजना के तहत 1.07 लाख रुपये की लागत से जल परिवहन पाइपलाइन बिछाई गई, जिसमें 86,192 रुपये की सब्सिडी दी गई। इससे जल का कुशल और नियंत्रित उपयोग संभव हुआ तथा फसल की गुणवत्ता में सुधार आया।
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