बीजापुर , नवंबर 04 -- छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना के रजत महोत्सव वर्ष 2025 में बीजापुर जिला सौर ऊर्जा क्रांति का उत्कृष्ट उदाहरण बनकर उभरा है। जिले में सौर सुजला योजना और सोलर ड्यूल पंप जैसी नवीन तकनीकों के माध्यम से किसानों और ग्रामीणों के जीवन में नई रोशनी आई है। इन योजनाओं ने न केवल कृषि उत्पादन बढ़ाया है, बल्कि पेयजल, स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय सुधार लाया है।
पहले बीजापुर के ग्रामीण इलाकों में सिंचाई की समस्या सबसे बड़ी चुनौती थी। अधिकांश किसान बरसाती पानी या डीजल पंपों पर निर्भर थे, जिससे खेती की लागत बढ़ती और उत्पादकता घटती थी। लेकिन अब सौर सुजला योजना के अंतर्गत किसानों को मुफ्त या रियायती दरों पर सोलर सिंचाई पंप उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इनसे किसान अपने खेतों में सालभर सिंचाई कर पा रहे हैं। जिले में अब तक 4,090 सोलर पंप संयंत्र स्थापित किए गए हैं, जिनसे लगभग 10,225 हेक्टेयर भूमि सिंचित हो रही है।
सौर ऊर्जा के उपयोग से किसानों ने अब धान के साथ-साथ सब्जी, तिलहन और दलहन फसलों की भी खेती शुरू कर दी है, जिससे उनकी आय में वृद्धि हुई है। इससे पलायन और बेरोजगारी जैसी समस्याओं में भी कमी आई है।
इसी प्रकार सोलर ड्यूल पंप तकनीक ने पेयजल आपूर्ति में नई दिशा दी है। जल जीवन मिशन के तहत लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग ने 1,558 सोलर ड्यूल पंप स्वीकृत किए हैं, जिनमें से 1,147 स्थापित हो चुके हैं। इनमें से 552 पंपों से ग्रामीण घरों में साफ पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित हुई है। इससे न केवल स्वच्छता में सुधार हुआ है, बल्कि ग्रामीण महिलाओं का समय भी बचा है और जलजनित बीमारियों में उल्लेखनीय कमी आई है।
क्रेडा विभाग ने भी जिले में ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में सराहनीय कार्य किया है। 25 वार्डों में 196 सोलर हाईमास्ट लाइटें लगाई गई हैं, जिससे रात्रिकालीन आवागमन सुरक्षित और सुगम हुआ है।
सौर ऊर्जा आधारित ये पहलें बीजापुर को हरित और आत्मनिर्भर जिला बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित हो रही हैं। आने वाले वर्षों में बीजापुर का यह मॉडल राज्य के अन्य जिलों के लिए प्रेरणा स्रोत बन सकता है।
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