नैनीताल , मार्च 23 -- उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने देहरादून स्थित सौंग नदी के स्वरूप को लेकर को सोमवार को सिंचाई विभाग से स्पष्टीकरण मांगा है। पूछा है कि सौंग नदी सदानीरा नदी है या मौसमी। इस मामले में दो सप्ताह बाद सुनवाई होगी।
दरअसल यह प्रकरण सौंग नदी के किनारे दून वैली स्टोन क्रेशर को लेकर सामने आया है। याचिकाकर्ता गुरचण सिंह की ओर से इस प्रकरण को चुनौती देते हुए कहा गया कि सौंग नदी के किनारे दून वैली स्टोन क्रेशर मानकों के विपरीत स्थापित किया गया है।
यह सदाबहार और सदानीरा नदी (पेरीनियल रिवर) है। मानकों के अनुसार नदी तट से स्टोन क्रेशर की दूरी लगभग 500 मीटर होनी चाहिए जबकि इसकी दूरी मात्र 105 मीटर है जबकि दूसरे पक्ष की ओर से कहा गया कि यह बरसाती नदी (नाॅन पेरीनियल रिवर) है। इसमें साल भर पानी उपलब्ध नहीं रहता है।
सुनवाई के दौरान यह भी बात सामने आयी कि सौंग नदी को लेकर सिंचाई विभाग में भी स्पष्टता नहीं है। सिंचाई विभाग की ओर से दो जगह अलग-अलग तथ्यों का उल्लेख किया गया है। एक जगह इसे गंगा की तरह पेरीनियल रिवर कहा गया है जबकि दूसरी जगह इसे मौसमी नदी बताया गया है।
इसके बाद खंडपीठ ने सिंचाई विभाग को निर्देश दिये कि वह स्पष्ट करे कि सौंग नदी पेरीनियल रिवर है या नाॅन पेरीनियल रिवर है।
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